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सरसों का बीज बाजार दबाव में है क्योंकि मिलें पीछे हट गई हैं और आवक बढ़ रही है

सरसों का बीज बाजार दबाव में है क्योंकि मिलें पीछे हट गई हैं और आवक बढ़ रही है

CMB
CMB News संपादकीय
Editorial Desk

भारत में सरसों के बीज की कीमतें गिर रही हैं क्योंकि मिल की मांग कमजोर हो रही है और नए फसल की आवक बढ़ रही है, जबकि EU खरीदार कज़ाख आपूर्ति का सहारा ले रहे हैं। विस्तृत आउटलुक और 3-दिन की भविष्यवाणी।

सरसों के बीज के बाजार कमजोर हो रहे हैं क्योंकि खाद्य तेल मिलों से मांग निराशाजनक है, ठीक जब नए फसल की आवक बढ़ रही है। घरेलू मंडी की कीमतें गिर रही हैं, और FOB प्रस्ताव सपाट से थोड़ा आसान हैं, भले ही वैश्विक खाद्य तेल बाजार अस्थिर बने हुए हैं। मूंग जैसे दालों के विपरीत, जो संतुलित मांग पर स्थिर बनी हुई हैं, सरसों स्पष्ट रूप से वर्तमान में मांग-चालित किमत में गिरावट की कहानी है।

इस सप्ताह की मुख्य कहानी सीधी है: सरसों का बीज दबाव में है क्योंकि खरीदार गायब हैं, न कि आपूर्ति के गिरने के कारण। कमजोर क्रशिंग मार्जिन, वैश्विक खाद्य तेल परिसर में कमजोर भावना और प्रमुख भारतीय मंडियों में आवक में लगातार वृद्धि, जिसमें जयपुर भी शामिल है, कीमतों पर बड़ा असर डाल रहे हैं। साथ ही, यूरोप कजाखस्तान से कम औसत आयात मूल्य पर बढ़ती मात्रा खींच रहा है, जो Sinapis alba की उपलब्धता को रेखांकित करता है। जब तक मिल की मांग फिर से जीवंत नहीं होती—या सस्ते बीज के माध्यम से, ताड़/वनस्पति तेल की कीमतों में बदलाव या नीति समर्थन द्वारा—सरसों संभवतः तेल बीज और दालों के परिसर का कमजोर भाग बना रहेगा, भले ही अन्य खंड अधिक संतुलित दिखें।

कीमतें और बाजार संरचना

स्पॉट और मंडी स्तर (भारत)

अंतिम कच्चे पाठ के अनुसार, प्रमुख भारतीय मंडियों में सरसों की कीमतें लगभग ₹6,000–₹6,500 प्रति क्विंटल पर आ गई हैं, जो लगभग $72–$78 प्रति 100 किलोग्राम के बराबर है। यह पुष्टि करता है कि गिरावट का रुख शारीरिक बाजार स्तर पर पहले से ही दिखाई दे रहा है, विशेष रूप से ऐसे बेंचमार्क केंद्रों जैसे जयपुर में, जहां तेल प्रोसेसरों से क्रशिंग की मांग कमजोर होने के कारण हाल की गिरावट आई है।

ये मंडी मूल्य उस बाजार को दर्शाते हैं जिसमें आपूर्ति सामान्य से बढ़ रही है, जबकि मिल की खरीद सुस्त है। महत्वपूर्ण रूप से, यह कमजोरी विशेष रूप से तेल बीजों के लिए है: मूंग जैसी दालें उच्च उत्पादन के बावजूद स्थिर बताई गई हैं, यह रेखांकित करते हुए कि समस्या खाद्य तेलों की मांग है, न कि एक सामान्य कृषि मंदी।

निर्यात और प्रस्ताव मूल्य (EUR में परिवर्तित)

प्रदान किए गए प्रस्ताव डेटा का उपयोग करते हुए (सभी मूल्य EUR/kg में हैं, पहले से ही यूरो में), सरसों का बीज FOB न्यू दिल्ली हाल की अपडेट में स्थिर रहा है, लेकिन कुछ प्रकारों के लिए यह फरवरी के अंत के स्तरों से नीचे है, जो मंडी कीमतों द्वारा संकेतित नरम टोन के अनुरूप है।

BASIC
बाज़ार डेटा तालिका
Schwarzer Pfeffer6.850 €/t+2,3 %
Koriander1.240 €/t−0,8 %
Kreuzkümmel2.100 €/t+1,5 %
Zimt (Cassia)8.900 €/t+0,4 %
Kurkuma3.200 €/t−1,2 %
Kardamom grün18.500 €/t+3,1 %
Ingwer (getr.)1.850 €/t+0,9 %
Chili (getr.)2.750 €/t−0,5 %
Schwarzer Pfeffer6.850 €/t+2,3 %
Koriander1.240 €/t−0,8 %
Kreuzkümmel2.100 €/t+1,5 %
Zimt (Cassia)8.900 €/t+0,4 %
Kurkuma3.200 €/t−1,2 %
Kardamom grün18.500 €/t+3,1 %
Ingwer (getr.)1.850 €/t+0,9 %
Chili (getr.)2.750 €/t−0,5 %
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EU में, हाल के व्यापार आंकड़ों से पता चलता है कि कजाखस्तान से सरसों के बीज का आयात 115% बढ़ गया है, जबकि औसत आयात मूल्य वर्ष-दर-वर्ष 22.4% घटकर लगभग EUR 0.59/kg हो गया है। कजाख Sinapis alba के लिए स्पॉट ऑफ़र लगभग EUR 700/mt DDP पोलैंड (~0.70 EUR/kg) यह दर्शाता है कि, इस सुधार के बावजूद, EU खरीदार अभी भी मध्य एशियाई आपूर्ति में मूल्य देख रहे हैं।

आपूर्ति और demanda के गुणन द्वारा

भारत: मांग-चालित कमजोरी

कच्चे पाठ स्पष्ट है: सरसों की कीमतें मुख्य रूप से इसलिए गिर रही हैं क्योंकि खाद्य तेल मिलों की मांग कमजोर है, न कि उत्पादन में किसी झटके के कारण। मिलें धीरे-धीरे खरीद रही हैं, जो कमजोर क्रशिंग मार्जिन और वैश्विक खाद्य तेल कीमतों में सामान्य नरम भावना को दर्शाता है, विशेष रूप से ताड़ का तेल, जो भारतीय रिफाइनर्स के लिए एक प्रमुख बेंचमार्क तेल बना हुआ है।

वैश्विक खाद्य तेल कीमतें, हाल के वर्षों में मजबूत उतार-चढ़ाव के बाद, 2026 की शुरुआत में सामान्य तौर पर नरम हो रही हैं, अंतरराष्ट्रीय वस्तुओं के आउटलुक के अनुसार, जिसमें ताड़ का तेल संभावित रूप से उपलब्ध आपूर्ति और धीमी मांग द्वारा प्रभावित होता है। यह नरमी सरसों के तेल में वापस feed करती है, जिससे मिलों के लिए बीज खरीदने की आवश्यकता को कम किया जाता है, विशेष रूप से जब ताड़ और सोयाबीन तेल में आयात विकल्प उपलब्ध हैं।

आवक बढ़ रही है और नए फसल का दबाव

भारतीय मंडियों में नए फसल की आवक बढ़ रही है, जो पहले से ही कमजोर मांग के कारण उत्पन्न दबाव को बढ़ा रही है। कच्चा पाठ यह रेखांकित करता है कि आवक प्रमुख बाजारों में बढ़ रही है जैसे जयपुर, जहां कीमतें पहले ही प्रोसेसरों से कमजोर क्रशिंग मांग के कारण गिर चुकी हैं। यह मौसमी पैटर्न के अनुरूप है: सरसों एक रबी फसल है जिसे फरवरी से अप्रैल के प्रारंभ तक काटा जाता है, जिसमें राजस्थान और अन्य प्रमुख राज्य शामिल हैं।

जैसे-जैसे अधिक बीज प्रणाली में उच्चतम फसल के दौरान प्रवाहित होते हैं, मांग पक्ष पर मात्रा को अवशोषित करने का दबाव होता है। मिलों के अनिच्छुक होने के कारण, निकट अवधि का संतुलन अधिक आपूर्ति की ओर झुका हुआ है, कम से कम वर्तमान मूल्य स्तरों पर। यही कारण है कि व्यापारी रिपोर्ट करते हैं कि, जब तक मिल की मांग में सुधार नहीं होता, बाजार निकट अवधि में नरम बना रहने की संभावना है।

दालें बनाम तेल बीज: एक विभाजित बाजार

व्यापक कृषि जटिलता स्पष्ट रूप से भिन्नता दिखाती है। दालें, जिन्हें यहां मूंग के द्वारा दर्शाया गया है, उच्च उत्पादन के बावजूद स्थिर बनी हुई हैं। उपभोक्ताओं से मांग संतुलित बताई गई है, आवक नियंत्रित हैं और खरीद द्वारा समर्थित हैं, और खपत स्थिर है। इससे कीमतें स्थिर रहती हैं और तेज गिरावट से रोकती हैं।

इसके विपरीत, सरसों कमजोर हो रही है क्योंकि खाद्य तेल की मांग गायब है। यह विभाजित बाजार पुष्टि करता है कि वर्तमान कमजोरी क्षेत्र-विशिष्ट है: दालें संरचनात्मक मांग और खरीद समर्थन का आनंद लेती हैं, जबकि तेल बीज, विशेष रूप से सरसों, वैश्विक तेल और क्रशिंग अर्थशास्त्र के प्रति अधिक संवेदनशील हैं। व्यापारियों और क्रशरों के लिए, यह भिन्नता हेजिंग और क्रॉस-कमोडिटी स्प्रेड रणनीतियों के लिए महत्वपूर्ण है।

यूरोप और कजाखस्तान: व्यापार प्रवाह में बदलाव

वैश्विक स्तर पर, कजाखस्तान यूरोपियन संघ (EU) के लिए सफेद सरसों (Sinapis alba) का越来越 महत्वपूर्ण आपूर्तिकर्ता बन गया है, जिसमें इस समूह के लिए आयात 115% बढ़ गए हैं और औसत आयात मूल्य वर्ष दर वर्ष काफी नीचे हैं। यह सुझाव देता है कि EU खरीदारों ने पहले से के ब्लैक सी व्यापार में बाधा के कारण पहले की कड़ी स्थिति के बाद सफलतापूर्वक आपूर्ति को विविधता दी है।

वर्तमान EU स्तर की कीमतें औसतन EUR 0.59/kg हैं, जबकि स्पॉट DDP पोलैंड के लिए कोट लगभग EUR 0.70/kg के निकट हैं, जो कजाखस्तान से देखे गए उत्पाद सूची (0.79–0.83 EUR/kg FCA पोलैंड) में वाणिज्यिक प्रस्तावों के साथ व्यापक रूप से मेल खाती हैं। यह यूरोपीय सरसों के बीज बाजार में अच्छी आपूर्ति को रेखांकित करता है, जो भारतीय निर्यातकों के लिए शॉर्ट टर्म में लक्षित यूरोप के लिए ऊपर का संभावनाओं को रोकता है।

मूलभूत बातें और बाहरी प्रेरक

वैश्विक खाद्य तेल का जटिलता और ऊर्जा बाजार

कच्चा पाठ यह नोट करता है कि "वैश्विक नरम भावना" खाद्य तेलों में—विशेष रूप से ताड़ के तेल में—सरसों पर दबाव बना रही है। यह व्यापक विश्लेषणों के साथ मेल खाता है जो देखते हैं कि ताड़ का तेल 2026 की शुरुआत में अपेक्षाकृत रेंजबाउंड तरीके से व्यापार कर रहा है, जिसमें पर्याप्त उत्पादन और सतर्क मांग वृद्धि है। नरम ताड़ और सोयाबीन तेल के बेंचमार्क सरसों के तेल की तुलनात्मक आकर्षकता को कम कर देते हैं, विशेष रूप से भारत जैसे मूल्य-संवेदनशील बाजारों में।

साथ ही, 2026 के ईरान युद्ध और संबंधित होर्मुज जलडमरूमध्य संकट ने कच्चे तेल को तेज़ी से बढ़ा दिया है, जिसमें ब्रेंट कच्चा तेल लगभग $70 से $80–$110 प्रति बैरल के ऊपर बढ़ गया है। सिद्धांत के अनुसार, उच्च ऊर्जा कीमतें बायोफ्यूल से जुड़े वनस्पति तेलों का समर्थन कर सकती हैं, लेकिन वर्तमान चरण में, वनस्पति तेल अभी भी पहले की आपूर्ति वृद्धि को पचाने में जुटे हुए हैं। विशेष रूप से सरसों के लिए, कच्चा पाठ यह संकेत करता है कि तत्काल प्रेरक अभी भी नरम खाद्य तेल की मांग है न कि ऊर्जा लागत का पास-थ्रू।

उत्पादन और स्टॉक्स की समीक्षा

भारत चीन और EU के बाद दुनिया का सबसे बड़ा सरसों/रैपसीड उत्पादक बना हुआ है, जिसमें राजस्थान, उत्तर प्रदेश और हरियाणा प्रमुख राज्य हैं। सरसों एक रबी फसल के रूप में उगाई जाती है और फरवरी-अप्रैल में काटी जाती है, जिसका अर्थ है कि 2025/26 फसल अब बाजार में आ रही है। इस मौसम में महत्वपूर्ण उपज हानि के कोई सबूत नहीं हैं; यदि कुछ भी हो, तो आवक सामान्य रूप से बढ़ रही है।

कजाखस्तान में, हाल की रिपोर्टों से पता चलता है कि, अधिक क्षेत्रफल के बावजूद, 2026 में सरसों के बीज का उत्पादन पिछले वर्ष की उपज के साथ मेल नहीं खा पाएगा, क्योंकि उपज औसत रहने की उम्मीद है। फिर भी, निर्यात की मात्रा इतनी अधिक है कि यह EU की बढ़ती मांग को पूरा कर सके। यह सुझाव देता है कि वैश्विक सरसों की उपलब्धता आरामदायक है, जिसमें स्थानीय रूप से किसी टूटने से अधिक संभावना लॉजिस्टिक्स या गुणवत्ता से प्रेरित होती है न कि संपूर्ण कमी से।

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बाज़ार डेटा तालिका
Schwarzer Pfeffer6.850 €/t+2,3 %
Koriander1.240 €/t−0,8 %
Kreuzkümmel2.100 €/t+1,5 %
Zimt (Cassia)8.900 €/t+0,4 %
Kurkuma3.200 €/t−1,2 %
Kardamom grün18.500 €/t+3,1 %
Ingwer (getr.)1.850 €/t+0,9 %
Chili (getr.)2.750 €/t−0,5 %
Schwarzer Pfeffer6.850 €/t+2,3 %
Koriander1.240 €/t−0,8 %
Kreuzkümmel2.100 €/t+1,5 %
Zimt (Cassia)8.900 €/t+0,4 %
Kurkuma3.200 €/t−1,2 %
Kardamom grün18.500 €/t+3,1 %
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अनुमानित स्थिति और भावना

जबकि सरसों के लिए विस्तृत CFTC-शैली का डेटा थोड़ा है, व्यापक तेल बीज परिसर में भावना अधिक सतर्क हो गई है। सीज़न की शुरुआत में, सरसों और अन्य तेल बीजों ने कड़े स्टॉक्स और मजबूत मांग के कारण मजबूत कीमतें आनंदित कीं; अब, वैश्विक खाद्य तेलों में कमी और ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता के साथ, अनुमानित लंबाई संभवतः कम हो गई है, विशेष रूप से छोटे, कम तरल अनुबंधों में।

कच्चा पाठ का उल्लेख "नरम वैश्विक भावना" और "खरीदारों की कमी" एक ऐसे बाजार के साथ मेल खाता है जहां दोनों भौतिक खरीदार और अनुमानक पीछे हट रहे हैं, खाद्य तेल की मांग की दिशा और संभावित नीति हस्तक्षेप के लिए स्पष्ट संकेतों की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

मौसम की भविष्यवाणी और उपज जोखिम

भारत (राजस्थान और उत्तर भारत)

भारत में सरसों मुख्य रूप से फरवरी के अंत से अप्रैल के शुरू तक काटी जाती है, जिसका मतलब है कि मार्च 2026 के मध्य तक, फसल का अधिकांश हिस्सा या तो काटा जा चुका है या अंतिम परिपक्वता स्तर पर है। ऐतिहासिक अनुभव यह दर्शाता है कि अनियामित मार्च बारिश और ओले खड़ी सरसों की फसलों को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा सकते हैं, जैसा कि मार्च 2015 में देखा गया था जब अत्यधिक वर्षा ने लगभग 10 मिलियन हेक्टेयर रबी फसलों को प्रभावित किया, जिसमें सरसों सबसे अधिक प्रभावित हुई थी।

राजस्थान से मौजूदा आपातकालीन सलाहें सरसों को एक पसंदीदा रबी विकल्प के रूप में रेखांकित करती हैं जहां मिट्टी की नमी उचित है, जिसमें उपज को समर्थन देने के लिए महत्वपूर्ण सिंचाई और थियौरेआ अनुप्रयोगों की सिफारिशें शामिल हैं। मार्च 2026 में व्यापक मौसम के नुकसान की कोई वर्तमान रिपोर्ट नहीं है। इस प्रकार, इस मौसम के लिए मौसम का जोखिम अब अपेक्षाकृत कम दिखाई देता है, जबकि मुख्य प्रभाव पहले ही लॉक हो चुका है और आवक अपेक्षित स्तर पर बढ़ रही है।

कजाखस्तान और पूर्वी यूरोप

कजाखस्तान में, सरसों (सफेद Sinapis alba) आमतौर पर वसंत में बोई जाती है, जिसमें अप्रैल-जून का मौसम स्थापना और पौधों के निष्कर्षण के लिए महत्वपूर्ण है। दीर्घकालिक दृष्टिकोण 2026 के लिए औसत उपज को सुझाते हैं, जबकि क्षेत्र का विस्तार किया गया है, जिसका मतलब है कि न तो एक बंपर और न ही इस चरण पर एक आपदा वाली फसल।

पूर्वी यूरोप और EU में, 2026 की शुरुआत में शीतकालीन स्थितियों ने सरसों या रैपसीड के खड़े फसलों के लिए प्रमुख चिंताएं नहीं उत्पन्न की हैं। जब तक देर से ठंड़ी या अधिक वसंत की नमी नहीं आती, मौसम वर्तमान में इन क्षेत्रों में सरसों के बीज की कीमतों के लिए एक तेजी का चालक नहीं है।

बाजार के प्रेरक और आउटलुक

मुख्य मंदी के कारक (सरसों)

  • कमजोर खाद्य तेल मांग: मिलें धीरे-धीरे खरीद रही हैं, सीधे जयपुर जैसी प्रमुख मंडियों में सरसों की कीमतों पर दबाव डाल रही हैं, जैसा कि कच्चे पाठ में उजागर किया गया है।
  • नरम ताड़ और वनस्पति तेल के बेंचमार्क: रेंजबाउंड से कमजोर ताड़ के तेल और व्यापक खाद्य तेल की पर्याप्त आपूर्ति क्रशिंग मार्जिन को कम करती है और पुनर्स्टॉकिंग में देरी करती है।
  • आवक बढ़ती है: नए फसल की सरसों की आवक मंडियों में बढ़ रही है, जैसे ही खरीदार पीछे हटते हैं।
  • वैश्विक प्रतिस्पर्धा: कजाखस्तान से यूरोप में बड़े, प्रतिस्पर्धात्मक मूल्य वाली आपूर्ति भारतीय निर्यातकों के लिए ऊपर की ओर सीमित करती है।

संभावित सहायक/तेजी के ट्रिगर्स

  • खाद्य तेल की मांग में सुधार: कच्चा पाठ इसे मुख्य ट्रिगर के रूप में पहचानता है; घरेलू खपत या रिफाइनिंग मार्जिन में किसी भी पुनर्प्राप्ति का मतलब होगा कि सरसों के बीज के लिए मजबूत मिल मांग का अनुवाद होगा।
  • ऊर्जा बाजार में परिणामी प्रभाव: ईरान संघर्ष के चलते संचालित उच्च कच्चे तेल की कीमतें धीरे-धीरे बायोफ्यूल से जुड़े वनस्पति तेलों को समर्थन दे सकती हैं और अप्रत्यक्ष रूप से सरसों के तेल के मूल्यों को मजबूत कर सकती हैं।
  • नीति परिवर्तन: खाद्य तेलों पर आयात शुल्क में परिवर्तन या तेल बीजों के लिए MSP/खरीद पहल शायद क्रशिंग प्रोत्साहनों और मूल्य के फर्श को बदल सकती हैं।
  • मौसम में आश्चर्य: भारत या कजाखस्तान में देर से मौसम के झटके एक कम लेकिन शून्य जोखिम हैं और अगर यह सच हो जाता है तो आपूर्ति को कड़ा कर सकता है।

ट्रेडिंग आउटलुक और सिफारिशें

क्रशरों और तेल मिलों के लिए

  • वर्तमान कमजोर मांग और नरम कीमतों को देखते हुए, आक्रामक फॉरवर्ड खरीदने की बजाय अनुशासित, क्रमबद्ध खरीद बनाए रखें। मंडी की कीमतों को बढ़ती आवक और सुस्त ऑफटेक को दर्शाने की अनुमति दें।
  • सरसों के तेल और प्रतिस्पर्धी तेलों (ताड़, सोयाबीन) के बीच के फैलाव की निगरानी करें। यदि वैश्विक वनस्पति तेल की कीमतें स्थिर या बढ़ती हैं जबकि सरसों का बीज कमजोर बना रहता है, तो क्रशिंग के मार्जिन में सुधार हो सकता है, जो बीज कवरेज बढ़ाने का आधार बनता है।
  • भारतीय क्रशरों के लिए जिनका निर्यात जोखिम है, स्थानीय बीज लागत (INR 6,000–6,500/qtl) की तुलना FOB सरसों के तेल और वैश्विक वनस्पति तेल के बेंचमार्क से करें ताकि आर्बिट्रेज विंडो की पहचान की जा सके।

निर्यातकों और व्यापारियों के लिए

  • भारतीय निर्यातकों को EU मसाला और क्रशिंग खंडों में कजाखस्तान से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। उत्कृष्ट गुणवत्ता (उच्च-शुद्धता сортेक्स, विशिष्ट रंग ग्रेड) और अनुकूल लॉजिस्टिक्स पर ध्यान केंद्रित करें ताकि प्रीमियम की रक्षा की जा सके।
  • यदि खाद्य तेल की मांग अपेक्षा से अधिक तेजी से पुनर्प्राप्त हो जाती है, तो आगे की संभावित नकारात्मकता से बचाने के लिए (जहां उपकरण मौजूद हो) अल्पकालिक हेजिंग रणनीतियों पर विचार करें।
  • यूरोप में, खरीदार मौजूदा आयात मूल्य सीमा (~0.60–0.70 EUR/kg) के आसपास मध्यम अवधि के लिए कवर लॉक कर सकते हैं, 2026 में बाद में उपज की निराशाओं के जोखिम को देखते हुए।

किसानों के लिए

  • किसान बाए समय पर सरसों की कीमतों पर दबाव में रहने पर, लागत प्रबंधन को प्राथमिकता दें और यदि संभव हो तो भंडारण के विकल्पों का मूल्यांकन करें, विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जहां मांग बाद में सीजन में बढ़ सकती है।
  • अगले बोने के चक्र के लिए, सरसों और मूंग जैसी दालों के बीच का अनुपातीय लाभ की तुलना करें, जो वर्तमान में संतुलित मांग और खरीद समर्थन के कारण अधिक स्थिर हैं।
  • अनुशंसित कृषि अभ्यासों (समय पर बोवाई, महत्वपूर्ण सिंचाई, थियौरेआ स्प्रे) का पालन करें ताकि उपज की रक्षा की जा सके, क्योंकि मूल्य में उतार-चढ़ाव कृषि स्तर के नियंत्रण से बाहर है।

शॉर्ट-टर्म मूल्य पूर्वानुमान (3-दिन, EUR में)

निम्नलिखित आउटलुक कच्चे पाठ संकेतों (कमजोर मिल मांग और बढ़ती आवक से निरंतर नरमी) को वर्तमान प्रस्ताव संरचनाओं और वैश्विक संदर्भ के साथ संगठित करता है। इसमें अगले तीन व्यापार दिनों में कोई बड़े नीति या मौसम के झटके की संभावना नहीं है।

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बाज़ार डेटा तालिका
Schwarzer Pfeffer6.850 €/t+2,3 %
Koriander1.240 €/t−0,8 %
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कुल मिलाकर, आधार मामला यह है कि भारतीय सरसों के बीज की कीमतें अगले तीन दिनों में धीरे-धीरे नीचे की ओर दबाव में रहने की संभावना है, यदि मंडी की कमजोरी जारी रहती है तो FOB ऑफ़र थोड़ा कम होने की संभावना है। कजाख Sinapis alba के लिए EU कीमतें अधिकतर साइडवेज पर ट्रैक करने की संभावना है, बनाए रखी गई आयात मांग और औसत उत्पादन अपेक्षाएं।

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