भारतीय मूंगफली बाजार: सरकारी समर्थन ने गिरावट को सीमित किया, लेकिन कमजोर दाम बरकरार
भारत की नई MSP‑समर्थित मूंगफली खरीद किसान आय को स्थिर करती है, लेकिन निर्यात पेशकशों पर दबाव बना रहता है। मूंगफली बाजार का संक्षिप्त आउटलुक और मूल्य परिदृश्य।
Prices
भारतीय मूंगफली के हालिया निर्यात संकेतक भाव जुलाई के अंत और अगस्त की शुरुआत के बीच हल्की नरमी दिखा रहे हैं। गुजरात (गोंडल) से बोल्ड 40–50 काउंट खेपें जुलाई मध्य में लगभग EUR 1.14/kg FCA से घटकर 7 अगस्त तक करीब EUR 1.05/kg FOB पर आ गई हैं, जबकि नई दिल्ली में 50–60 और 60–70 काउंट के भाव भी इसी अवधि में लगभग EUR 0.03/kg नरम हुए हैं। ब्राज़ीलियाई कच्ची मूंगफली की पेशकशों में भी समान रुझान दिखा, जो करीब EUR 1.25/kg FOB से फिसलकर लगभग EUR 1.20/kg के नजदीक आ गई हैं।
सप्ताह‑दर‑सप्ताह का यह सीमित लेकिन लगातार गिरता रुझान दिखाता है कि बाजार अभी भी आरामदेह सप्लाई और सीमित अल्पकालिक मांग को पचा रहा है। बर्डफीड और निम्न श्रेणी (लोअर‑ग्रेड) की मूंगफली में भी हल्की नरमी दिख रही है, जो इस धारणा को मजबूती देती है कि भारत द्वारा समर्थन मूल्य के जरिए उत्पादक आय बढ़ाने की औपचारिक घोषणाओं के बावजूद सौदेबाजी में बढ़त अभी भी खरीदारों के पास है।
Supply & Demand
भारत सरकार ने उत्तर प्रदेश, गुजरात, तमिलनाडु और हरियाणा में दालों और तिलहनों की MSP पर नई खरीद को मंजूरी दी है। उत्तर प्रदेश पैकेज में मूंगफली को स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है, जहां अधिकारी मूल्य समर्थन योजना (Price Support Scheme) के तहत 41,000 टन से अधिक ग्रीष्मकालीन मूंगफली की खरीद कर सकते हैं। यह हस्तक्षेप खुले बाजार में कमजोर भाव और बढ़ती उत्पादन लागत के प्रति प्रतिक्रिया है, जिनके कारण समग्र रूप से संतोषजनक उत्पादन के बावजूद किसानों के मार्जिन पर दबाव पड़ा है।
गुजरात और अन्य राज्यों के लिए आधिकारिक फोकस मूंग (moong) पर है, लेकिन व्यापक नीतिगत संदेश स्पष्ट है: केंद्र सरकार घरेलू दाल और तिलहन उत्पादन बढ़ाने, आयात निर्भरता कम करने और खाद्य व पोषण सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है। एक प्रमुख खाद्य तेल और प्रोटीन फसल के रूप में मूंगफली को इस रुख से परोक्ष लाभ मिलता है। जहां‑जहां मंडी भाव MSP से नीचे जाते हैं, वहां सरकारी खरीद की संभावना किसानों की मजबूरी में होने वाली बिकवाली (डिस्ट्रेस सेलिंग) को सीमित करती है और निजी चैनलों में सप्लाई के दबाव को धीमा करती है, भले ही स्वीकृत खरीद मात्रा भारत की कुल मूंगफली फसल की तुलना में सीमित ही क्यों न हो।
Weather & Crop Conditions
2026 का मानसून काफी असमान रहा है। सूखे जून के बाद जुलाई में गुजरात और राजस्थान के कुछ हिस्सों में भारी वर्षा की घटनाएं दर्ज की गईं, जिसके बाद मानसून सीजन के अंतिम हफ्तों में वर्षा में कमी की संभावना जताई जा रही है, क्योंकि सुपर एल नीन्यो और सकारात्मक हिंद महासागर द्विध्रुव (Indian Ocean Dipole) पैटर्न का प्रभाव बढ़ रहा है। गुजरात और आसपास के राज्यों में मूंगफली के लिए पहले की भारी बारिश ने स्थानीय स्तर पर जलभराव की आशंका बढ़ाई, जबकि अब सीजन के अंत में सामान्य से कम वर्षा का अनुमान पैदावार में आगे की बढ़त को सीमित कर सकता है, लेकिन साथ ही रोग‑प्रकोप के जोखिम को भी घटा सकता है।
क्षेत्रीय एग्रो‑मौसम विज्ञान सेवाओं की सलाह में राष्ट्रीय स्तर पर किसी तीव्र सूखा या बाढ़ जोखिम की जगह, अनियमित वर्षा की स्थिति में मूंगफली फसल की सुरक्षा और बीज उपचार पर विशेष ध्यान देने की बात कही गई है। समग्र रूप से देखा जाए तो मौसम एक निगरानी‑योग्य कारक बना हुआ है, लेकिन अभी तक यह स्पष्ट तेजी (बुलिश) कारक नहीं है; इससे आधारभूत परिदृश्य यही बनता है कि भारत में समुचित आपूर्ति रहेगी, हालांकि कुछ क्षेत्रों में गुणवत्ता से जुड़ी स्थानीय समस्याएं हो सकती हैं, ना कि व्यापक स्तर पर फसल की कमी।
Fundamentals & Policy Signals
दालों और तिलहनों के लिए मूल्य समर्थन योजना (Price Support Scheme) लागू करने और उत्तर प्रदेश में मूंगफली के लिए महत्वपूर्ण आवंटन तय करने के निर्णय को सबसे बेहतर तरीके से इस रूप में समझा जा सकता है कि सरकार उन स्थितियों का जवाब दे रही है, जहां कई फसलों के लिए मंडी भाव MSP से नीचे चल रहे हैं। मूंग, उड़द और मूंगफली की स्वीकृत खरीद मात्रा का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि "उचित प्रतिफल" (remunerative returns) मिल सके, ऐसे समय में जब इनपुट लागत बढ़ी हुई हैं और आउटपुट कीमतें नरम हैं, जिससे किसानों की आय पर दबाव है।
मूंगफली के लिए 2024–25 सीजन में ऊंचे MSP और विस्तृत खरीद अधिकारों का संयोजन कीमतों के लिए दीर्घकालिक नीतिगत न्यूनतम स्तर को मजबूत करता है। हालांकि, MSP परिचालन भौगोलिक और परिचालन (ऑपरेशनल) सीमाओं से बंधे हैं, और अल्पावधि में कमजोर निर्यात बुनियाद (फंडामेंटल्स) को पूरी तरह संतुलित नहीं कर सकते। व्यापारी अभी भी ब्राजील और अन्य मूल‑स्थानों से प्रतिस्पर्धी पेशकशों की रिपोर्ट कर रहे हैं, जबकि कमजोर वैश्विक मांग और सस्ते वनस्पति तेल बेंचमार्क्स के चलते भारत की निर्यात साम्यता (एक्सपोर्ट पैरिटी) पर भी दबाव है।
Trading Outlook
निकट भविष्य में मूंगफली बाजार के नरम, दायरे‑बद्ध (रेंज‑बाउंड) पैटर्न में रहने की संभावना अधिक है। सरकारी खरीद प्रतिबद्धताएं राजनीतिक रूप से भले ही महत्वपूर्ण हों, लेकिन वे भारत के कुल उत्पादन की तुलना में सीमित हैं और विशेष राज्यों व मौसमों पर लक्षित हैं। अगस्त के अंत और सितंबर तक मौसम‑जनित व्यवधानों का जोखिम बना हुआ है, लेकिन मौजूदा पूर्वानुमान किसी व्यापक फसल‑आघात (सिस्टेमिक क्रॉप शॉक) की बजाय बिखरी हुई विषमताओं की ओर इशारा करते हैं।
नीतिगत समर्थन, प्रबंधनीय आपूर्ति और सतर्क मांग के मौजूदा संतुलन को देखते हुए, मौजूदा यूरो‑आधारित मूल्य स्तरों से downside अब सीमित होती दिखती है, लेकिन स्पष्ट upside ट्रिगर अभी भी नदारद हैं। अस्थिरता (वोलैटिलिटी) में बढ़ोतरी संभव है, खासकर तब जब कमज़ोर अंतिम‑मॉनसून वर्षा की पुष्टि हो या खरीद के क्रियान्वयन पर नई आधिकारिक घोषणाएं आएं, विशेषकर गुजरात और उत्तर प्रदेश में, जहां तिलहन और दाल‑आधारित अर्थव्यवस्थाएं अधिक जोखिम में हैं।
- आयातक / रोस्टर (EU और MENA): Q4 2026 और शुरुआती 2027 के लिए मौजूदा यूरो स्तरों पर चरणबद्ध तरीके से कवरेज बनाने पर विचार करें, खासकर गुजरात की बोल्ड काउंट मूंगफली और नई दिल्ली की जावा किस्मों के लिए, क्योंकि MSP‑समर्थित खरीद और मौसम‑जोखिम, कीमतों में लंबे समय तक और गिरावट के खिलाफ तर्क पेश करते हैं।
- भारतीय निर्यातक: मौजूदा कमजोर कीमतों का उपयोग अग्रिम बिक्री (फॉरवर्ड सेल्स) सुनिश्चित करने के लिए करें, लेकिन अगर मंडी भाव MSP से नीचे बने रहते हैं और सरकारी खरीद बढ़ती है, तो घरेलू उपलब्धता में नीतिगत रूप से प्रेरित कसाव (टाइटनिंग) की संभावना को देखते हुए अत्यधिक मात्रा की प्रतिबद्धता से बचें।
- फीड और बर्डफूड सेगमेंट: ज़रूरत‑आधारित (हैंड‑टू‑माउथ) रणनीति बनाए रखें; निम्न‑श्रेणी की मूंगफली की कीमतें सबसे अधिक दबाव में हैं और अगर मांग सुस्त रही तो ये खाद्य‑ग्रेड (edible grades) की किसी भी रिकवरी की तुलना में पीछे रह सकती हैं।
3-Day Directional View (EUR basis)
- भारत (गुजरात – गोंडल, बोल्ड 40–50, FOB): साइडवेज से हल्की नरमी, लगभग EUR 1.04–1.06/kg, क्योंकि निर्यातकों के बीच प्रतिस्पर्धा बनी हुई है।
- भारत (नई दिल्ली, बोल्ड 50–60 और 60–70, FOB): साइडवेज, लगभग EUR 0.99–1.02/kg; नीतिगत खबरें आगे की गिरावट को सीमित कर रही हैं।
- ब्राजील (कच्ची, FOB): EUR 1.19–1.22/kg की दायरे‑बद्ध चाल, वैश्विक तिलहन सेंटीमेंट और मालभाड़ा परिस्थितियों को ट्रैक करते हुए।