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भारत में मसूर की कीमतों में नरमी, मिलों ने ऊंचे स्तरों पर खरीद से कदम खींचे

भारत में मसूर की कीमतों में नरमी, मिलों ने ऊंचे स्तरों पर खरीद से कदम खींचे

CMB
CMB News संपादकीय
Editorial Desk

भारत में मसूर की कीमतें नरम, क्योंकि मिलों की खरीद घट रही है और आयातित आपूर्ति भरपूर है। कीमतों के रुझान, आपूर्ति, मौसम जोखिम और अल्पकालिक आउटलुक का अवलोकन।

भारत के मसूर बाजार में नरमी आ रही है, हाल के ऊंचे स्तरों से कीमतें ढीली हुई हैं क्योंकि मिलें खरीद पर अंकुश लगा रही हैं और कनाडा व ऑस्ट्रेलिया से आयातित मसूर प्रतिस्पर्धी स्तर पर ही पेश की जा रही हैं। निकट अवधि में आपूर्ति सहज है और बंदरगाहों पर कमजोर रुझान, अंतर्निहित मांग मौजूद रहने के बावजूद, आगे की तेजी पर अंकुश लगा रहे हैं। भारत में प्रोसेसिंग मांग पिछली तेजी के बाद अधिक सतर्क हो गई है, मिलें अब केवल तत्काल जरूरत के हिसाब से सीमित खरीद कर रही हैं। आयातित माल, खासकर कनाडा और ऑस्ट्रेलिया से, बंदरगाहों और आंतरिक केंद्रों दोनों पर कीमतों पर दबाव बना रहे हैं। साथ ही, कनाडा से घटती एफओबी वैल्यू और चीन से थोड़ी कम पेशकश जैसे वैश्विक संकेतक व्यापक सुधारवादी माहौल की पुष्टि करते हैं। ऑस्ट्रेलिया में मौसम पर निगाह बनी हुई है, लेकिन फिलहाल 2026/27 फसल का परिदृश्य समग्र रूप से अनुकूल है, जो आने वाले महीनों में पर्याप्त आपूर्ति की उम्मीदों को मजबूत करता है।

कीमतें

भारत में, दिल्ली की देशी मसूर लगभग USD 0.52 प्रति क्विंटल गिरकर करीब USD 71.4–71.6 प्रति क्विंटल पर आ गई, जबकि कनाडाई M25 मसूर लगभग USD 0.26 घटकर USD 62.6–63.1 प्रति क्विंटल पर आ गई। ऑस्ट्रेलियाई मूल की मसूर लगभग USD 62.3–62.6 प्रति क्विंटल के आसपास पेश की गई, और मुंबई में कनाडाई कार्गो करीब USD 58.7–59.2 प्रति क्विंटल पर कारोबार हुए, जो सभी ओरिजिन्स पर व्यापक कमजोरी को दर्शाता है।

अन्य स्थानों पर भी स्पॉट और एफओबी संकेतक नीचे की ओर इशारा कर रहे हैं। जून में कनाडा की सूखी मसूर निर्यात कीमतें औसतन लगभग USD 0.66/किग्रा रहीं, जबकि कनाडा में हाल के रिटेल और नकद बोली भावों में लाल मसूर के लिए सप्ताह-दर-सप्ताह और गिरावट दिखी है। 【0search8】 चीन की छोटी हरी मसूर (एफओबी बीजिंग) की कीमतें जुलाई के दौरान थोड़ी नरम हुई हैं, 17 जुलाई को नॉन-ऑर्गेनिक ऑफर लगभग EUR 1.14/किग्रा और ऑर्गेनिक करीब EUR 1.22/किग्रा रहे, जो शुरुआती जुलाई के स्तरों से मामूली रूप से नीचे हैं। यूरो में परिवर्तित करने पर, भारत की थोक कीमतें अब भी ओरिजिन ऑफर्स के मुकाबले प्रीमियम दर्शाती हैं, लेकिन भारतीय बाजारों में कमजोरी के साथ यह प्रीमियम घटा है।

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बाज़ार डेटा तालिका
Schwarzer Pfeffer6.850 €/t+2,3 %
Koriander1.240 €/t−0,8 %
Kreuzkümmel2.100 €/t+1,5 %
Zimt (Cassia)8.900 €/t+0,4 %
Kurkuma3.200 €/t−1,2 %
Kardamom grün18.500 €/t+3,1 %
Ingwer (getr.)1.850 €/t+0,9 %
Chili (getr.)2.750 €/t−0,5 %
Schwarzer Pfeffer6.850 €/t+2,3 %
Koriander1.240 €/t−0,8 %
Kreuzkümmel2.100 €/t+1,5 %
Zimt (Cassia)8.900 €/t+0,4 %
Kurkuma3.200 €/t−1,2 %
Kardamom grün18.500 €/t+3,1 %
Ingwer (getr.)1.850 €/t+0,9 %
Chili (getr.)2.750 €/t−0,5 %
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आपूर्ति और मांग

भारत का निकट अवधि का बैलेंस आरामदायक है। प्रमुख खपत केंद्रों में घरेलू मसूर की आवकें पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में अधिक बनी हुई हैं, और मिलों ने कीमतों में उछाल के बाद खरीद घटा दी है। प्रोसेसर हल्का स्टॉक रख रहे हैं और केवल तत्काल जरूरतों की पूर्ति कर रहे हैं, जिससे किसी तरह की आपूर्ति तंगी नहीं हो रही है और बंदरगाहों व आंतरिक केंद्रों पर आयातित माल पर दबाव बना हुआ है।

वैश्विक स्तर पर, आपूर्ति संकेत समग्र रूप से पर्याप्त बने हुए हैं। ऑस्ट्रेलिया, जो भारत का प्रमुख आपूर्तिकर्ता है, के बारे में आधिकारिक अनुमानों के अनुसार 2026/27 में लगभग 2.2 मिलियन टन की रिकॉर्ड मसूर फसल होने का पूर्वानुमान है, जो उसके 10-वर्षीय औसत से अधिक से अधिक दोगुनी है। 【0search1】 रिपोर्टें यह भी बताती हैं कि कुल शीतकालीन उत्पादन में समग्र गिरावट के बावजूद, मसूर उन कुछ ऑस्ट्रेलियाई शीतकालीन फसलों में से है जिनका उत्पादन बढ़ रहा है। 【0search2】 कनाडा में, 2026/27 में बोई गई क्षेत्रफल में थोड़ी कमी आने की उम्मीद है, लेकिन औसत कीमतों के पिछले सीजन से ऊपर रहने का अनुमान है, जिसका मतलब है कि मौजूदा नरमी अपेक्षाकृत ऊंचे स्तरों से हो रही है। 【0search3】

उपभोक्ता स्तर पर, ऊंची खाद्य मुद्रास्फीति ने अभी तक मसूर की मांग को मुख्य प्रोटीन के रूप में नष्ट नहीं किया है, लेकिन खासकर शहरी रिटेल चैनलों में कीमतों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ रही है। भारत में, पटना की देशी मसूर का स्तर करीब USD 72.7 प्रति क्विंटल पर स्थिर बना रहना दिखाता है कि अंतर्निहित खपत जारी है, भले ही ट्रेडर अधिक सतर्क ढंग से काम कर रहे हों। समग्र रूप से, मांग पक्ष स्थिर है लेकिन मात्रा-वृद्धि की बजाय अब अधिक कीमत-संचालित होता जा रहा है।

बुनियादी कारक और मौसम

भारत में अल्पावधि का प्रमुख कारक मिलों की संयमित खरीद है। एक अवधि की मजबूत कीमतों के बाद मिलों और दाल प्रोसेसरों ने पीछे हटते हुए न्यूनतम कार्यशील स्टॉक रखा है और फॉरवर्ड कवरेज घटा दी है। इस व्यवहारिक बदलाव ने तेजी से घरेलू और आयातित दोनों मसूर के लिए बोली घटा दी है, खासकर बंदरगाहों पर पड़ी कनाडाई और ऑस्ट्रेलियाई खेपों के लिए।

आपूर्ति की तरफ, पर्याप्त आयात उपलब्धता मंदी की धारणा को मजबूत कर रही है। कनाडा और ऑस्ट्रेलिया से पहले से पाइपलाइन में मौजूद बड़े वॉल्यूम, आक्रामक रीस्टॉकिंग के लिए कम प्रोत्साहन छोड़ते हैं, जब तक कि त्योहार सीजन की मांग या नीतिगत बदलाव पर स्पष्ट संकेत न मिलें। ऑस्ट्रेलिया में शीतकालीन दलहनों के लिए मौसमी परिस्थितियां मिश्रित लेकिन समग्र रूप से पर्याप्त हैं; आधिकारिक अपडेट थोड़ी सूखी जुलाई की संभावना के बावजूद राष्ट्रीय स्तर पर मसूर की औसत से ऊपर पैदावार की ओर इशारा करते हैं, खासकर दक्षिण ऑस्ट्रेलिया के कुछ हिस्सों में। 【0search4】【0search17】 फिलहाल कोई तीव्र मौसम झटका नजर नहीं आ रहा है जो तत्काल वैश्विक मसूर आपूर्ति को भौतिक रूप से कड़ा कर सके।

मौसम और फसल परिदृश्य

दक्षिण ऑस्ट्रेलिया और विक्टोरिया में स्थित ऑस्ट्रेलिया का मसूर बेल्ट शुरुआती सीजन में अच्छी वर्षा से लाभान्वित हुआ है, पिछले वर्ष की तुलना में तेज सुधार और मजबूत फसल स्थापना की रिपोर्टें हैं। 【0search9】 ताजा राष्ट्रीय फसल रिपोर्ट में 2026/27 में मसूर उत्पादन में लगभग 3% की वृद्धि के साथ रिकॉर्ड 2.2 मिलियन टन तक पहुंचने का अनुमान है, जिसे बढ़े हुए क्षेत्र और आम तौर पर अनुकूल नमी समर्थन दे रही है। 【0search1】【0search13】

अल्पावधि पूर्वानुमान जुलाई में दक्षिण-पूर्वी दक्षिण ऑस्ट्रेलिया के कुछ हिस्सों के लिए औसत से कम वर्षा के संकेत दिखाते हैं, 【0search17】 लेकिन फिलहाल सबसॉइल नमी भंडार इस अवधि में फसल को संभालने के लिए पर्याप्त हैं। जब तक यह शुष्कता बढ़कर या लंबी होकर महत्वपूर्ण फूलने और फली भरने के चरणों तक नहीं पहुंचती, ऑस्ट्रेलियाई आपूर्ति परिदृश्य सहज बना रहना चाहिए, जो भारत जैसे आयात-निर्भर बाजारों के लिए मंद से तटस्थ रुझान को मजबूत करता है।

कारोबारी रुझान (अगले 1–3 सप्ताह)

  • रुझान: भारतीय मसूर और आयातित मसूर के लिए हल्का मंद से रेंज-बाउंड, जिसमें downside को अभी भी मजबूत अंतर्निहित खपत और संभावित नीतिगत या मौसम संबंधी सुर्खियां सीमित करेंगी।
  • भारत में आयातक: मौजूदा स्तरों पर भारी फॉरवर्ड कमिटमेंट से बचें; चरणबद्ध खरीद पर विचार करें, स्थानीय बाजारों में किसी भी शॉर्ट-कवरिंग रैली का उपयोग कीमतों का पीछा करने के बजाय सीमित वॉल्यूम में धीरे-धीरे खरीद बढ़ाने के लिए करें।
  • प्रोसेसर/मिलें: जब तक आवक मजबूत है और ऑस्ट्रेलियाई मौसम अनुकूल है, हाथ-से-मुंह कवरेज बनाए रखना तार्किक है। यदि ऑस्ट्रेलियाई पूर्वानुमान उल्लेखनीय रूप से अधिक शुष्क हो जाएं या घरेलू आवक मौसमी रूप से घटने लगे, तो कवरेज तेजी से बढ़ाने के लिए तैयार रहें।
  • उत्पादक/निर्यातक (कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, चीन): भारतीय खरीदारों से कीमतों पर दबाव जारी रहने की अपेक्षा करें। दक्षिण एशिया में वॉल्यूम बनाए रखने के लिए प्रतिस्पर्धी मूल्य निर्धारण और लॉजिस्टिक लचीलापन निकट अवधि में महत्वपूर्ण रहेंगे।

3‑दिवसीय दिशात्मक दृष्टिकोण (EUR शर्तों में)

  • भारत थोक मसूर (EUR में कनवर्टेड): थोड़ा नरम से साइडवेज; सीमित नई खरीद रुचि से मामूली और नरमी की गुंजाइश बनती दिखती है।
  • FOB कनाडा (ग्रीन और रेड मसूर): ज्यादातर स्थिर से हल्का कमजोर, क्योंकि निर्यात ऑफर हाल की नकद बोलियों में आई गिरावट और सुस्त आयात मांग को फॉलो कर रहे हैं।
  • FOB चीन छोटी हरी मसूर: हाल की मामूली कीमत कटौती के बाद साइडवेज से हल्का नकारात्मक रुझान; किसी भी महत्वपूर्ण मूवमेंट की संभावना दक्षिण एशियाई खरीद में बदलाव पर निर्भर होगी।
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