मिस्र द्वारा चीनी आयात पर अप्रैल 2026 के अंत तक बढ़ाए गए प्रतिबंध ने क्षेत्रीय और वैश्विक चीनी बाज़ार में आपूर्ति के पुनर्संतुलन और कीमतों में सहारे का माहौल बना दिया है। घरेलू उत्पादन तेज़ी से बढ़ने के बावजूद मिस्र की खपत उससे ऊपर बनी हुई है, जिससे नीति‑निर्माताओं को आयात सीमित करते हुए भी रणनीतिक भंडार मजबूत रखने के बीच संतुलन बिठाना पड़ रहा है। यूरोप में थोक दाम स्थिर से हल्के मज़बूत हैं, जबकि भारत में उत्पादन उछाल और मौसम की अनिश्चितताओं के बीच कीमतों पर दोतरफ़ा दबाव दिख रहा है।
चीनी बाज़ार फिलहाल नीतिगत हस्तक्षेप, क्षेत्रीय आपूर्ति‑मांग असंतुलन और मौसम जोखिमों के संगम से संचालित हो रहा है। मिस्र ने नवंबर 2025 में शुरू किए गए वाणिज्यिक चीनी आयात प्रतिबंध को अप्रैल 2026 के अंत तक बढ़ा दिया है, ठीक ईद‑उल‑फ़ितर से पहले जब स्थानीय खपत परंपरागत रूप से तेज़ हो जाती है। इससे मिस्र के घरेलू उत्पादकों को दाम का सहारा मिलता है, लेकिन खपत उत्पादन से ऊपर रहने के कारण आयात पर निर्भरता पूरी तरह समाप्त नहीं होती, केवल स्तर और स्रोत संरचना बदलती है।
यूरोप में एफसीए आधार पर थोक दाम 0.42–0.54 यूरो/किग्रा की रेंज में रहे हैं, जिन्हें मौजूदा विनिमय दर पर लगभग 37.8–48.6 रुपये/किग्रा के बराबर माना जा सकता है, और पिछले एक महीने में इन दामों में हल्की मज़बूती दिखी है। भारत में 2025‑26 सीज़न के लिए उत्पादन अनुमानों में 13–16% तक की वृद्धि और गन्ना मूल्य में बढ़ोतरी के बावजूद, मौसम आधारित जोखिम और नीति‑आधारित निर्यात प्रबंधन घरेलू कीमतों को नियंत्रित दायरे में रखे हुए हैं। आने वाले हफ्तों में मिस्र की नीति, ब्राज़ील व भारत की आपूर्ति और मौसम के रुझान मिलकर अंतरराष्ट्रीय चीनी कीमतों की अगली दिशा तय करेंगे।
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📈 कीमतें और हालिया रुझान
अंतरराष्ट्रीय व क्षेत्रीय परिप्रेक्ष्य
मिस्र के संदर्भ में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव वाणिज्यिक चीनी आयात पर प्रतिबंध का नवंबर 2025 से लागू होना और अब इसे अप्रैल 2026 के अंत तक बढ़ाया जाना है। इस कदम का सीधा उद्देश्य घरेलू उत्पादकों को संरक्षण देना, स्थानीय बाज़ार में दामों को स्थिर रखना और रणनीतिक भंडार को मजबूत बनाना है। चूँकि मिस्र की खपत उसके उत्पादन से अधिक है, प्रतिबंध मुख्यतः वाणिज्यिक आयातकों को लक्षित करता है, जबकि आवश्यक मात्रा के लिए नियंत्रित आयात और भंडार प्रबंधन जारी रहता है।
यूरोपीय थोक बाज़ार में एफसीए आधार पर ग्रेन्युलेटेड चीनी के दाम हाल के सप्ताहों में काफ़ी स्थिर रहे हैं। जर्मनी के बर्लिन में आईसीयूएमएसए 45 ग्रेड चीनी का दाम 16 मार्च 2026 को लगभग 0.54 यूरो/किग्रा (लगभग 48.6 रुपये/किग्रा, 1 यूरो ≈ 90 रुपये मानते हुए) पर स्थिर रहा, जो 10 मार्च के 0.54 यूरो/किग्रा से अपरिवर्तित है, लेकिन 4 मार्च के 0.50 यूरो/किग्रा (≈ 45 रुपये/किग्रा) से ऊपर है। इसी तरह, चेक गणराज्य और ब्रिटेन में 0.46 यूरो/किग्रा (≈ 41.4 रुपये/किग्रा) तथा यूक्रेन मूल की चीनी 0.42 यूरो/किग्रा (≈ 37.8 रुपये/किग्रा) पर स्थिर रही।
इन स्थिर से हल्के मज़बूत यूरोपीय दामों के बीच, मिस्र का आयात प्रतिबंध वैश्विक प्रवाह को पुनर्विन्यस्त कर रहा है। 2024‑25 में मिस्र ने लगभग 1.26 मिलियन टन चीनी आयात की थी, जो 2025‑26 में बढ़ी हुई घरेलू उत्पादन के कारण लगभग 1.06 मिलियन टन पर आने की उम्मीद है। आयात मूल्य 2025 में लगभग 647 मिलियन अमेरिकी डॉलर था, जो पिछले वर्ष से 36.5% कम है, जिससे स्पष्ट है कि मात्रा और अंतरराष्ट्रीय कीमत दोनों स्तरों पर दबाव पहले ही कम हो चुका है।
यूरोप में थोक कीमतें (एफसीए, अनुमानित रूप से रुपये/किग्रा में)
| उत्पत्ति / स्थान | ग्रेड / प्रकार | ताज़ा बंद भाव (INR/किग्रा) | 1 सप्ताह परिवर्तन (INR/किग्रा) | भावना |
|---|---|---|---|---|
| जर्मनी, बर्लिन | ICUMSA 45, 0.4–0.65 मि.मी. | ≈ 48.6 | +3.6 (4 मार्च ~45.0 से) | हल्का तेज़ी वाला, स्थिर माँग |
| ब्रिटेन, नॉरफ़ॉक | ICUMSA 32–45, विभिन्न दाने | ≈ 41.4 | +2.7 (4 मार्च ~38.7 से) | मध्यम तेज़ी, स्थिर निर्यात रुचि |
| चेक गणराज्य, विश्कोव | ICUMSA 45, विभिन्न दाने | ≈ 41.4 | +1.8 (4 मार्च ~39.6 से) | संतुलित, आपूर्ति सहज |
| यूक्रेन/चेकिया | ICUMSA 45, 0.4–1.0 मि.मी. | ≈ 37.8 | +0.9 (4 मार्च ~36.9 से) | कमज़ोर से स्थिर, प्रतिस्पर्धी |
ऊपर के सभी दाम 16 मार्च 2026 तक उपलब्ध यूरो आधारित थोक कोटेशन से लिए गए हैं और 1 यूरो ≈ 90 रुपये की अनुमानित दर से रुपये में बदले गए हैं। पिछले एक महीने में लगभग सभी यूरोपीय लोकेशनों पर 2–4 रुपये/किग्रा की मज़बूती दिखती है, जो वैश्विक स्तर पर चीनी की कसी हुई लेकिन संतुलित आपूर्ति, ऊर्जा लागत और नीति‑आधारित जोखिम प्रीमियम को दर्शाती है।
🌍 आपूर्ति और माँग: मिस्र केंद्र में
मिस्र का उत्पादन प्रोफ़ाइल
मिस्र का चीनी उत्पादन हाल के सीज़नों में तेज़ी से बढ़ा है, जो वर्तमान नीति‑निर्णय का मूल आधार है। 2024‑25 में देश ने लगभग 3.1 मिलियन टन चीनी का उत्पादन किया, जो वर्ष‑दर‑वर्ष 19.2% की वृद्धि है। 2025‑26 के लिए उत्पादन अनुमान लगभग 3.18 मिलियन टन है, यानी अतिरिक्त 2.6% की वृद्धि। यह वृद्धि मुख्यतः चीनी चुकंदर (बीट) उत्पादन में 34% उछाल से संचालित है।
उत्पादन संरचना में अब चीनी चुकंदर का वर्चस्व है, जो कुल उत्पादन का लगभग 77.4% योगदान देता है, जबकि गन्ना केवल 22.6% पर सिमट गया है। यह बदलाव जल‑संकट और खेती की उत्पादकता के लिहाज़ से रणनीतिक है, क्योंकि चुकंदर अपेक्षाकृत कम पानी में भी अच्छा उत्पादन देता है। मिस्र की 16 प्रसंस्करण इकाइयों में 8 गन्ना आधारित (मुख्यतः सरकारी) और 8 चुकंदर आधारित (5 निजी और 3 सरकारी) कारखाने शामिल हैं, जो उद्योग को विविध और प्रतिस्पर्धी बनाते हैं।
मिस्र में खपत और आपूर्ति अंतर
उत्पादन बढ़ने के बावजूद मिस्र में चीनी की खपत उससे ऊपर बनी हुई है। 2024‑25 में खपत लगभग 3.75 मिलियन टन आंकी गई, जबकि 2025‑26 में इसके लगभग 3.85 मिलियन टन तक बढ़ने की उम्मीद है। इस तरह उत्पादन और खपत के बीच 0.6–0.7 मिलियन टन का स्थायी अंतर बना हुआ है, जिसे आयात के माध्यम से भरना पड़ता है।
2024‑25 में मिस्र ने लगभग 1.26 मिलियन टन चीनी आयात की, जो 2025‑26 में बढ़े हुए घरेलू उत्पादन के कारण लगभग 1.06 मिलियन टन पर आने का अनुमान है। 2025 में चीनी आयात का मूल्य लगभग 647 मिलियन अमेरिकी डॉलर था, जो पिछले वर्ष से 36.5% कम है, जबकि निर्यात लगभग 306 मिलियन डॉलर रहा। आयात का लगभग 95% ब्राज़ील से आता है, शेष मुख्यतः यूरोपीय संघ से, जबकि निर्यात में लेबनान (35%), सूडान (23%) और केन्या (11.4%) प्रमुख गंतव्य हैं।
आयात‑निर्यात नीति और बाज़ार संतुलन
मिस्र ने न केवल वाणिज्यिक चीनी आयात पर प्रतिबंध बढ़ाया है, बल्कि चीनी निर्यात को भी घरेलू उपलब्धता से सशर्त जोड़ रखा है। केवल तब निर्यात की अनुमति है जब उत्पादन घरेलू खपत से अधिक हो, ताकि स्थानीय बाज़ार में किसी भी तरह की कमी न हो। यह नीति देश के लिए दोहरा लाभ देती है: एक ओर घरेलू दामों में अत्यधिक गिरावट रोकी जाती है, दूसरी ओर निर्यात के माध्यम से अतिरिक्त उत्पादन से विदेशी मुद्रा कमाई भी संभव रहती है।
ईद‑उल‑फ़ितर से ठीक पहले प्रतिबंध विस्तार का समय भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस अवधि में पारंपरिक मिठाइयों (जैसे काह्क) के कारण खपत में मौसमी उछाल आता है। सरकार चाहती है कि इस मांग उछाल के समय बाज़ार में पर्याप्त उपलब्धता और दामों में स्थिरता बनी रहे, ताकि उपभोक्ता महंगाई और सामाजिक असंतोष न बढ़े। साथ ही, हाल के महीनों में मिस्र सरकार और नियामक निकायों ने चीनी व्यापार को कमोडिटी एक्सचेंज पर पुनः सूचीबद्ध करने और आयात‑निर्यात तंत्र को संतुलित करने पर भी ज़ोर दिया है, जिससे भविष्य में पारदर्शिता और मूल्य खोज बेहतर हो सके।
📊 वैश्विक मूलभूत स्थितियाँ और भारत की भूमिका
भारत में उत्पादन और नीति परिदृश्य
भारत, जो दुनिया के सबसे बड़े चीनी उत्पादकों में से एक है, 2025‑26 सीज़न में उत्पादन वृद्धि के चरण में है। उद्योग अनुमानों के अनुसार, 2025‑26 में भारत का चीनी उत्पादन (एथनॉल के लिए डायवर्जन को छोड़कर) लगभग 29.6–34.35 मिलियन टन तक पहुँच सकता है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 13–16% की वृद्धि है। यह वृद्धि बेहतर गन्ना क्षेत्र, अनुकूल मौसम और उपज में सुधार से प्रेरित है।
उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे प्रमुख राज्यों में उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है, हालांकि कुछ क्षेत्रों में वर्षा के कारण रेटून फसल की उपज पर दबाव की भी रिपोर्ट है। उत्तर प्रदेश सरकार ने 2025‑26 पेराई सीज़न के लिए गन्ना राज्य सलाहकार मूल्य (SAP) में 30 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की है, जिससे गन्ना किसानों की आय में सुधार होगा, लेकिन मिलों की लागत भी बढ़ेगी। यह लागत वृद्धि यदि अंतरराष्ट्रीय दाम नरम रहे तो घरेलू चीनी दामों पर ऊपर की ओर दबाव डाल सकती है।
ब्राज़ील और अन्य निर्यातक
मिस्र के आयात स्रोतों में ब्राज़ील की 95% हिस्सेदारी यह दिखाती है कि वैश्विक चीनी व्यापार में ब्राज़ील की भूमिका कितनी केंद्रीय है। ब्राज़ील की फसल और एथनॉल नीति में कोई भी बड़ा बदलाव मिस्र जैसे आयातक देशों के लिए दाम और उपलब्धता दोनों स्तरों पर जोखिम पैदा कर सकता है। फिलहाल, ब्राज़ील से मजबूत आपूर्ति और एथनॉल‑चीनी स्विच की लचीलापन वैश्विक बाज़ार को अपेक्षाकृत संतुलित रखे हुए है।
यूरोपीय संघ और यूक्रेन जैसे क्षेत्रीय आपूर्तिकर्ता भी मिस्र और आसपास के बाज़ारों के लिए वैकल्पिक स्रोत बने हुए हैं, विशेषकर रिफाइंड चीनी के लिए। यूरोप में 37.8–48.6 रुपये/किग्रा के मौजूदा एफसीए थोक दाम मिस्र के लिए आयात लागत का एक संदर्भ बिंदु हैं, हालांकि वास्तविक सीआईएफ दाम में फ्रेट और बीमा जोड़ने पर लागत और बढ़ जाती है। मिस्र की आयात नीति में किसी भी ढील या कड़ाई का सीधा प्रभाव इन स्रोतों की शिपमेंट पर पड़ सकता है।
🌦 मौसम परिदृश्य (भारत केंद्रित) और उत्पादन जोखिम
भारत के प्रमुख गन्ना क्षेत्र
भारत में चीनी उत्पादन का बड़ा हिस्सा उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्यों से आता है। हाल के मौसम अनुमानों के अनुसार, मार्च माह में देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से अधिक अधिकतम तापमान की प्रवृत्ति देखी जा रही है, जो रबी फसलों के साथ‑साथ गन्ने की नमी आवश्यकताओं पर भी असर डाल सकती है। भारतीय मौसम विभाग ने पिछले वर्ष भी मार्च के लिए उच्च तापमान की चेतावनी दी थी, जो अब एक आवर्ती पैटर्न की ओर इशारा करता है।
महाराष्ट्र के कुछ क्षेत्रों में वर्षा और तापमान के उतार‑चढ़ाव ने पिछली फसल में उपज पर दबाव डाला था, जबकि उत्तर प्रदेश ने अपेक्षाकृत स्थिर मौसम के कारण बेहतर रिकवरी दर दर्ज की। 2025‑26 सीज़न के लिए उपलब्ध शुरुआती रिपोर्टें संकेत देती हैं कि कुल मिलाकर मौसम अब तक अनुकूल रहा है, लेकिन गर्म मार्च और संभावित हीट‑वेव की स्थिति में मिट्टी की नमी और सिंचाई लागत बढ़ सकती है। इससे उत्पादन अनुमानों में मामूली कटौती और लागत में वृद्धि की संभावना बनी रहती है, जो घरेलू दामों को सहारा दे सकती है।
अगले 3 दिनों का संक्षिप्त मौसम दृष्टिकोण (भारत)
अगले तीन दिनों (18–20 मार्च 2026) के लिए भारत के प्रमुख गन्ना क्षेत्रों – पश्चिमी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड की तराई, महाराष्ट्र के पश्चिमी हिस्से और कर्नाटक – में सामान्य से थोड़ा अधिक अधिकतम तापमान और मुख्यतः शुष्क मौसम की संभावना है। कहीं‑कहीं हल्की स्थानीय वर्षा हो सकती है, लेकिन बड़े पैमाने पर कोई व्यापक वर्षा प्रणाली सक्रिय नहीं दिखती। ऐसे में सिंचाई पर निर्भरता और फसल के लिए पानी प्रबंधन की आवश्यकता बढ़ी रहेगी, हालांकि तत्काल उत्पादन पर बड़ा नकारात्मक प्रभाव फिलहाल नहीं दिखता।
📉 मिस्र की नीति का वैश्विक बाज़ार पर प्रभाव
क्षेत्रीय व्यापार प्रवाह में बदलाव
मिस्र द्वारा वाणिज्यिक चीनी आयात पर प्रतिबंध बढ़ाने से अल्पावधि में ब्राज़ील और यूरोप से मिस्र की ओर जाने वाली रिफाइंड चीनी की मांग पर कुछ दबाव कम हो सकता है। हालाँकि, चूँकि मिस्र अभी भी खपत अंतर भरने के लिए नियंत्रित आयात जारी रखेगा, इसलिए वैश्विक स्तर पर कोई बड़ा अधिशेष तुरंत नहीं दिखता। असल प्रभाव यह है कि मिस्र अपने रणनीतिक भंडार और घरेलू उत्पादन पर अधिक निर्भर होता जा रहा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में उसकी खरीद की लय अधिक असमान और अवसरवादी हो सकती है।
निर्यात पक्ष पर, मिस्र ने चीनी निर्यात को केवल अधिशेष उत्पादन तक सीमित किया हुआ है, जिससे क्षेत्रीय बाज़ारों – विशेषकर लेबनान, सूडान और केन्या – में आपूर्ति की विश्वसनीयता मिस्र के घरेलू संतुलन पर निर्भर हो गई है। यदि भविष्य में मौसम या नीति के कारण मिस्र का अधिशेष घटता है, तो इन देशों को ब्राज़ील या एशियाई आपूर्तिकर्ताओं की ओर अधिक झुकना पड़ सकता है, जिससे मालभाड़ा और कीमत दोनों पर असर पड़ेगा।
कीमतों पर समग्र प्रभाव
वैश्विक स्तर पर, मिस्र की आयात माँग में 0.2 मिलियन टन की अनुमानित कमी (1.26 से 1.06 मिलियन टन) कुल व्यापारित मात्रा की तुलना में सीमित है, लेकिन क्षेत्रीय स्तर पर इसका मनोवैज्ञानिक और संरचनात्मक प्रभाव अधिक है। निवेशक और सट्टेबाज़ मिस्र की नीतियों को मध्य‑पूर्व और उत्तर अफ्रीका क्षेत्र के चीनी दामों के लिए अग्रणी संकेतक के रूप में देखते हैं, जिससे ICE और क्षेत्रीय फ्यूचर्स बाज़ारों में जोखिम प्रीमियम की गणना में यह कारक जुड़ जाता है।
यूरोप में स्थिर से मज़बूत थोक दाम, भारत में बढ़ती उत्पादन लागत और ब्राज़ील में एथनॉल‑चीनी स्विच की लचीलापन मिलकर यह संकेत देते हैं कि निकट अवधि में चीनी के अंतरराष्ट्रीय दामों में तेज़ गिरावट की संभावना सीमित है। मिस्र का आयात प्रतिबंध अल्पकालिक रूप से वैश्विक दामों पर हल्का दबाव डाल सकता है, लेकिन घरेलू बाज़ार में यह दामों को सहारा देता है और उत्पादकों के मार्जिन की रक्षा करता है।
📌 ट्रेडिंग आउटलुक और रणनीतिक सिफारिशें
- मिस्र केंद्रित भौतिक व्यापारियों के लिए: अप्रैल 2026 के अंत तक वाणिज्यिक आयात प्रतिबंध के चलते मिस्र को लक्षित नई लंबी अवधि की सप्लाई डील्स में सावधानी बरतें। घरेलू नीति में किसी भी ढील या नए सर्कुलर के संकेतों पर नज़र रखते हुए, स्पॉट‑आधारित या शॉर्ट‑टर्म कॉन्ट्रैक्ट को प्राथमिकता दें।
- यूरोपीय निर्यातकों के लिए: 41–49 रुपये/किग्रा के मौजूदा एफसीए दामों पर यूरोप से मिस्र और आस‑पास के बाज़ारों के लिए प्रतिस्पर्धा बनी रहेगी, लेकिन यूक्रेन और ब्राज़ील से आने वाली सस्ती आपूर्ति के कारण मार्जिन दबाव में रह सकते हैं। गुणवत्ता‑आधारित प्रीमियम और लॉजिस्टिक दक्षता पर ज़ोर दें।
- भारत के मिलों के लिए: बढ़ा हुआ गन्ना SAP और संभावित गर्म मौसम को देखते हुए लागत और उत्पादन जोखिम दोनों ऊँचे हैं। घरेलू नीति (बफर स्टॉक, निर्यात कोटा, एथनॉल डायवर्जन) पर नज़र रखते हुए हेजिंग रणनीतियाँ (फ्यूचर्स/ऑप्शंस) अपनाएँ और अंतरराष्ट्रीय दामों में किसी भी तेज़ उछाल पर निर्यात अवसरों का उपयोग करें।
- सट्टेबाज़/फंड्स के लिए: मिस्र की नीति, भारत‑ब्राज़ील उत्पादन और मौसम जोखिमों का संयोजन मध्यम अवधि में दामों के लिए रेंज‑बाउंड से हल्का तेज़ी वाला परिदृश्य सुझाता है। ICE और क्षेत्रीय फ्यूचर्स में गिरावट पर खरीद और ऊँचाई पर आंशिक मुनाफ़ा बुकिंग की रणनीति उपयुक्त रह सकती है, बशर्ते जोखिम प्रबंधन कड़ा रखा जाए।
- उपभोक्ता उद्योग (खाद्य‑पेय) के लिए: अगले 6–9 महीनों में चीनी दामों में अत्यधिक अस्थिरता की संभावना सीमित दिखती है, लेकिन ऊपर की ओर जोखिम अधिक है। जहाँ संभव हो, मध्यम अवधि के खरीद अनुबंधों और विकल्पों के माध्यम से लागत को लॉक करने पर विचार करें, विशेषकर ईद, दिवाली और अन्य त्योहारों से पहले की मांग अवधि के लिए।
📆 3‑दिवसीय क्षेत्रीय मूल्य पूर्वानुमान (अनुमानित, INR/किग्रा)
नीचे दिया गया पूर्वानुमान 16 मार्च 2026 तक उपलब्ध यूरोपीय एफसीए दामों, हालिया रुझानों और विनिमय दर (1 यूरो ≈ 90 रुपये) पर आधारित है। यह केवल सूचनात्मक है और वास्तविक बाज़ार दाम इससे भिन्न हो सकते हैं।
| क्षेत्र / बाज़ार | उत्पाद | आज का अनुमानित थोक दाम (17 मार्च, INR/किग्रा) |
18 मार्च 2026 अनुमान (INR/किग्रा) |
19 मार्च 2026 अनुमान (INR/किग्रा) |
20 मार्च 2026 अनुमान (INR/किग्रा) |
भावना |
|---|---|---|---|---|---|---|
| यूरोप – जर्मनी (एफसीए) | ग्रेन्युलेटेड चीनी, ICUMSA 45 | ≈ 48.6 | 48.5–49.0 | 48.5–49.5 | 48.0–49.5 | स्थिर से हल्की तेज़ी |
| यूरोप – चेकिया/यूके (एफसीए) | ग्रेन्युलेटेड चीनी, ICUMSA 32–45 | ≈ 41.4 | 41.0–42.0 | 41.0–42.0 | 40.5–42.0 | स्थिर |
| यूरोप – यूक्रेन मूल (एफसीए) | ग्रेन्युलेटेड चीनी, ICUMSA 45 | ≈ 37.8 | 37.5–38.5 | 37.5–38.5 | 37.0–38.5 | कमज़ोर से स्थिर |
मिस्र के लिए सीधे थोक दामों के सार्वजनिक और पारदर्शी कोटेशन सीमित हैं, लेकिन घरेलू उत्पादन वृद्धि, आयात प्रतिबंध और नियंत्रित निर्यात व्यवस्था को देखते हुए स्थानीय दामों पर ऊपर की ओर दबाव सीमित रहने की संभावना है। यदि अंतरराष्ट्रीय दामों में अचानक तेज़ी आती है या मौसम के कारण घरेलू फसल पर असर पड़ता है, तो मिस्र को आयात प्रतिबंधों में आंशिक ढील देनी पड़ सकती है, जो वैश्विक दामों के लिए अल्पकालिक तेज़ी कारक साबित होगा।


