सरसों बीज के घरेलू बाज़ार में इस समय नरम से स्थिर रुझान देखने को मिल रहा है, जहां प्रमुख थोक मंडियों में कीमतें सीमित दायरे में घूम रही हैं। कच्चे माल के रूप में सरसों की सबसे बड़ी खरीदार तेल मिलें हैं, लेकिन फिलहाल मिलों की खरीद केवल तत्काल क्रशिंग की ज़रूरतों तक सीमित है, जिससे समग्र मांग का टोन दबा हुआ है। कच्चे बाज़ार के आंकड़ों के अनुसार, कई मंडियों में सरसों के औसत भाव लगभग ₹6,000 प्रति क्विंटल के आसपास बने हुए हैं, जो हाल के ऊपरी स्तरों से थोड़ा नीचे हैं और एक रेंज-बाउंड, साइडवेज़ मार्केट की ओर इशारा करते हैं। मिलों की सतर्क खरीद और स्टॉकिस्टों की सीमित रुचि के कारण ऊपर की ओर तेज़ उछाल फिलहाल दबा हुआ है, जबकि आरामदायक आपूर्ति और नियमित आवक ने नीचे की ओर बड़े गिरावट के जोखिम को भी सीमित किया है।
वर्तमान थोक स्तरों की तुलना यदि अंतरराष्ट्रीय और निर्यात-उन्मुख ऑफ़र से की जाए, तो नई दिल्ली से FOB आधार पर भारतीय सरसों बीज (ब्राउन व येलो, विभिन्न ग्रेड) के ऑफ़र लगभग 0.74–1.00 EUR/किग्रा के बीच हैं, जिन्हें मोटे तौर पर 1 EUR ≈ ₹90 मानकर देखें तो यह लगभग ₹6,660–₹9,000 प्रति क्विंटल के बराबर बैठते हैं। इससे संकेत मिलता है कि घरेलू मंडी भाव (लगभग ₹6,000–₹6,700/क्विंटल की हालिया रेंज) के ऊपर निर्यात-ग्रेड, उच्च गुणवत्ता वाले बीज पर प्रीमियम बना हुआ है, जबकि घरेलू क्रशिंग क्वालिटी पर मिलों की कमजोर खरीद के कारण दबाव है। देश के कई राज्यों—विशेषकर राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, हरियाणा व पंजाब—में 2025–26 रबी सीज़न में सरसों का रकबा पिछले वर्ष की तुलना में 3–6% तक बढ़ा है और फसल की स्थिति सामान्य से बेहतर बताई जा रही है, जिससे उत्पादन में लगभग 10% तक वृद्धि की संभावना बन रही है। यह आरामदायक आपूर्ति परिदृश्य, साथ ही मार्च–मई 2026 के लिए सामान्य से अधिक गर्मी के पूर्वानुमान, तेल निष्कर्षण की मार्जिन और तेल की खपत पर मिश्रित प्रभाव डाल सकते हैं, लेकिन बीज बाज़ार के लिए समग्र संदेश फिलहाल यही है कि निकट अवधि में दाम साइडवेज़ से हल्के कमजोर दायरे में रह सकते हैं, जब तक कि मिल खरीद में स्पष्ट सुधार या मौसम से जुड़ा कोई बड़ा झटका सामने न आए।
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📈 कीमतें और हालिया रुझान
थोक मंडी रुझान (भारत)
रॉ टेक्स्ट के अनुसार, प्रमुख भारतीय थोक मंडियों में सरसों के दाम हाल के सत्रों में नरम से स्थिर बने हुए हैं:
- कई मंडियों में भाव का दायरा लगभग ₹5,950–₹7,200 प्रति क्विंटल के बीच है, जिसमें औसत स्तर लगभग ₹6,000 प्रति क्विंटल के आसपास देखा जा रहा है।
- रॉ टेक्स्ट यह भी बताता है कि कीमतें हाल के ऊपरी स्तरों से थोड़ी नीचे हैं और मिलों की कमजोर खरीद के कारण ऊपर की ओर गति सीमित है।
- व्यवहारिक रूप से यह बाज़ार को एक रेंज-बाउंड और साइडवेज़ ट्रेडिंग ज़ोन में रखता है, जहां तेज़ उछाल या तेज़ गिरावट दोनों ही फिलहाल सीमित हैं।
निर्यात/ऑफ़र आधारित संकेत (INR में रूपांतरण)
दिए गए ऑफ़र प्राइस मूल रूप से EUR/किग्रा में हैं, जिन्हें लगभग 1 EUR = ₹90 मानकर INR में बदला गया है। सभी कीमतें अनुमानित हैं और केवल संकेतक उद्देश्य से दी जा रही हैं।
| उत्पाद विवरण | मूल स्थान | डिलीवरी शर्त | तारीख | मौजूदा ऑफ़र (INR/किग्रा) | मौजूदा ऑफ़र (INR/क्विंटल) | पिछला ऑफ़र (INR/किग्रा) | साप्ताहिक परिवर्तन | भावनात्मक संकेत |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| सरसों बीज, ब्राउन, बोल्ड, सॉर्टेक्स | नई दिल्ली, भारत | FOB | 14-03-2026 | ₹66.6 | ₹6,660 | ₹66.6 | 0% | स्थिर, हल्का नरम |
| सरसों बीज, ब्राउन, माइक्रो, सॉर्टेक्स | नई दिल्ली, भारत | FOB | 14-03-2026 | ₹74.7 | ₹7,470 | ₹74.7 | 0% | स्थिर |
| सरसों बीज, येलो, माइक्रो, सॉर्टेक्स | नई दिल्ली, भारत | FOB | 14-03-2026 | ₹81.0 | ₹8,100 | ₹81.0 | 0% | स्थिर |
| सरसों बीज, येलो, बोल्ड, सॉर्टेक्स | नई दिल्ली, भारत | FOB | 14-03-2026 | ₹90.0 | ₹9,000 | ₹90.0 | 0% | उच्च गुणवत्ता, प्रीमियम स्थिर |
| सरसों बीज, सिनैपिस अल्बा | कज़ाखस्तान मूल, पोलैंड FCA | FCA | 06-03-2026 | ₹74.7 | ₹7,470 | ₹71.1 | ≈+5% | हल्का मज़बूत |
निष्कर्ष (कीमत अनुभाग से): घरेलू औसत मंडी भाव (लगभग ₹6,000–₹6,700/क्विंटल) की तुलना में उच्च गुणवत्ता वाले निर्यात ग्रेड पर प्रीमियम बना हुआ है, लेकिन सप्ताह दर सप्ताह ऑफ़र में बहुत अधिक उतार-चढ़ाव नहीं दिख रहा, जो रॉ टेक्स्ट के “सीमित दायरे” और “साइडवेज़” रुझान की पुष्टि करता है।
🌍 आपूर्ति एवं मांग की स्थिति
आरामदायक आपूर्ति और नियमित आवक
- रॉ टेक्स्ट के अनुसार, स्टॉक पर्याप्त हैं और उत्पादक क्षेत्रों से नियमित आवक जारी है, जिससे आपूर्ति की स्थिति आरामदायक बनी हुई है।
- ऐसी स्थिति में खरीदारों पर तुरंत बड़ी खरीद करने का दबाव नहीं होता, जिसके कारण कीमतों में तेज़ उछाल नहीं बन पा रहा है।
- थोक बाज़ार में मिलें केवल तत्काल क्रशिंग आवश्यकता के हिसाब से खरीद कर रही हैं, जिससे कुल मांग का टोन कमजोर है।
उत्पादन एवं रकबे का परिदृश्य (भारत)
- 2025–26 रबी सीज़न में भारत में सरसों का रकबा पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 3–6% अधिक बताया जा रहा है, कई रिपोर्टें 3.2% से 6% के बीच वृद्धि का अनुमान देती हैं।
- उद्योग अनुमानों के अनुसार, 2025–26 में भारत की सरसों उत्पादन में लगभग 10% तक वृद्धि की संभावना है, जो पिछले वर्ष की तुलना में अधिक आरामदायक आपूर्ति की ओर संकेत करता है।
- रकबे में बढ़ोतरी मुख्य रूप से राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब जैसे पारंपरिक उत्पादक राज्यों से आ रही है।
मांग पक्ष – तेल मिलें, सरसों तेल और खली
- रॉ टेक्स्ट स्पष्ट रूप से बताता है कि तेल मिलें सरसों बीज की सबसे बड़ी खरीदार हैं और उनकी खरीद में सुस्ती पूरे बाज़ार को दबाव में रख रही है।
- मिलें फिलहाल केवल इमीडिएट क्रशिंग के लिए बीज उठा रही हैं, स्टॉक बिल्डिंग या अग्रिम खरीद बहुत सीमित है।
- इसका सीधा असर यह है कि अगर सरसों तेल या खली की मांग में अचानक उछाल न आए, तो बीज बाज़ार में तेज़ रैली की संभावना सीमित रहती है।
📊 फ़ंडामेंटल्स और संरचनात्मक कारक
नीतिगत पृष्ठभूमि और MSP
- 2025–26 के लिए सरसों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) लगभग ₹5,950/क्विंटल के आसपास है, और ताज़ा मंडी भाव कई स्थानों पर MSP के आसपास या उससे ऊपर ट्रेड कर रहे हैं।
- MSP के ऊपर ट्रेड होना किसानों के लिए सकारात्मक है, लेकिन मिल मार्जिन पर दबाव डाल सकता है, जिससे मिलें खरीद में और अधिक चयनात्मक हो जाती हैं।
वैश्विक परिप्रेक्ष्य (संक्षेप में)
- भारत दुनिया के सबसे बड़े रेपसीड–सरसों उत्पादकों में से एक है और वैश्विक उत्पादन में इसका हिस्सा लगभग 10–11% के आसपास माना जाता है।
- कनाडा, चीन और कुछ यूरोपीय देशों में रेपसीड/कैनोला उत्पादन भी अच्छा रहने की संभावना है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में तेलबीज आपूर्ति अपेक्षाकृत आरामदायक दिख रही है, जो भारतीय सरसों पर अप्रत्यक्ष दबाव डाल सकती है।
स्पेकुलेटिव पोज़िशनिंग और फ्यूचर्स
- SEBI के निर्देशों के अनुसार, रेपसीड–सरसों (RMSEED) सहित कुछ कृषि कमोडिटी फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स पर प्रतिबंध 31 मार्च 2026 तक बढ़ाया गया है।
- इससे सट्टा गतिविधि सीमित है और स्पॉट बाज़ार पर फ्यूचर्स का असर कम हो गया है, जो रॉ टेक्स्ट में वर्णित “सीमित दायरे” और “कम वॉलेटिलिटी” वाले व्यवहार से मेल खाता है।
🌦️ मौसम परिदृश्य और फसल पर प्रभाव
उत्तर-पश्चिम भारत (राजस्थान, हरियाणा, पंजाब)
- मार्च 2026 के लिए मौसम मॉडल और चर्चा संकेत दे रहे हैं कि भारत के बड़े हिस्सों, विशेषकर उत्तर-पश्चिम क्षेत्र में सामान्य से अधिक गर्मी की संभावना है।
- पंजाब और दिल्ली क्षेत्र में शुरुआती मार्च में ही अधिकतम तापमान सामान्य से 7–10 डिग्री सेल्सियस तक ऊपर दर्ज किया जा रहा है, जो रबी फसलों के लिए तनावपूर्ण हो सकता है यदि यह लंबे समय तक जारी रहे।
- राजस्थान (जैसलमेर–जयपुर बेल्ट) में मार्च के लिए दीर्घकालिक औसत अधिकतम तापमान लगभग 31°C के आसपास रहता है, लेकिन इस वर्ष गर्मी कुछ अधिक महसूस की जा रही है।
सरसों फसल पर संभावित प्रभाव
- मार्च तक अधिकांश सरसों फसल फली भरने से कटाई की ओर बढ़ जाती है; इस चरण में अत्यधिक गर्मी व तेज़ हवा से दाने के आकार और तेल प्रतिशत पर हल्का नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, लेकिन अभी तक व्यापक स्तर पर बड़े नुकसान की रिपोर्ट नहीं है।
- पिछले वर्षों के अनुभव के अनुसार, जनवरी–फरवरी में ओलावृष्टि या असामान्य वर्षा सरसों को अधिक नुक़सान पहुंचाती है; इस वर्ष अब तक ऐसी व्यापक घटनाएँ सीमित रही हैं, जो उत्पादन अनुमान के लिए सकारात्मक है।
- कुल मिलाकर, मौसम अभी भी “मुख्यतः अनुकूल” श्रेणी में है, हालांकि कटाई के समय गर्मी तेज़ होने से नमी तेज़ी से घट सकती है और फसल जल्दी पक सकती है।
🌐 वैश्विक उत्पादन और स्टॉक तुलना
उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों और उद्योग अनुमानों के आधार पर, 2025–26 के लिए रेपसीड–सरसों की वैश्विक तस्वीर मोटे तौर पर इस प्रकार है (आंकड़े अनुमानित, मिलियन टन में):
| देश/क्षेत्र | अनुमानित उत्पादन (एमटी) | मुख्य भूमिका | टिप्पणी |
|---|---|---|---|
| भारत | ≈12–13 | बड़ा उत्पादक, मुख्यतः घरेलू खपत | रकबा 3–6% बढ़ा, उत्पादन ~10% अधिक संभावित। |
| कनाडा | ≈18–19 (कैनोला) | प्रमुख निर्यातक | कैनोला तेल–खली के माध्यम से वैश्विक तेलबीज बाज़ार पर प्रभाव। |
| चीन | ≈13–14 | बड़ा उत्पादक व उपभोक्ता | घरेलू मांग ऊँची, आयात भी महत्वपूर्ण। |
| यूरोपीय संघ | ≈18–19 | प्रमुख रेपसीड उत्पादक | बायोडीज़ल और खाद्य तेल उद्योग के लिए महत्वपूर्ण। |
भारत की बढ़ती उत्पादन क्षमता और आरामदायक घरेलू स्टॉक का मतलब है कि वैश्विक तंगाई की स्थिति में भी भारतीय बाज़ार पर अत्यधिक आयात निर्भरता नहीं है; उल्टे, उच्च उत्पादन वर्षों में घरेलू सरसों पर दबाव बढ़ जाता है, जैसा कि वर्तमान नरम रुझान से भी झलकता है।
📆 निकट अवधि बाज़ार दृष्टिकोण
रॉ टेक्स्ट आधारित आउटलुक
- रॉ टेक्स्ट के अनुसार, निकट अवधि में सरसों की कीमतें साइडवेज़ से हल्की कमजोर रह सकती हैं।
- भविष्य की दिशा तीन मुख्य कारकों पर निर्भर बताए गए हैं:
- तेल मिलों की खरीद गतिविधि – यदि क्रशिंग मार्जिन सुधरते हैं और मिलें स्टॉक बढ़ाने लगती हैं तो बाज़ार में मजबूती आ सकती है।
- उत्पादक राज्यों से आवक – यदि कटाई व आवक तेज़ रहती है तो आपूर्ति दबाव से भाव सीमित रहेंगे।
- सरसों तेल व बाय-प्रोडक्ट (खली आदि) की मांग – घरेलू व निर्यात मांग में सुधार बीज की कीमतों को सहारा दे सकता है।
3-दिवसीय क्षेत्रीय मूल्य पूर्वानुमान (INR/क्विंटल, संकेतक)
आधार: वर्तमान औसत मंडी भाव ~₹6,000–₹6,700/क्विंटल, मिल खरीद सुस्त, आपूर्ति आरामदायक, मौसम मुख्यतः अनुकूल। यह केवल विश्लेषणात्मक अनुमान है, वास्तविक कीमतें स्थानीय स्थिति पर निर्भर होंगी।
| क्षेत्र/मार्केट | दिन 1 | दिन 2 | दिन 3 | रुझान |
|---|---|---|---|---|
| राजस्थान (जयपुर–भरतपुर बेल्ट) | ₹5,900–₹6,300 | ₹5,900–₹6,350 | ₹5,900–₹6,400 | साइडवेज़ से हल्का मजबूत (यदि मिल खरीद सुधरे) |
| हरियाणा (नारायणगढ़, अन्य मंडियां) | ₹6,200–₹7,000 | ₹6,200–₹7,050 | ₹6,200–₹7,100 | ऊपरी स्तरों पर रेंज-बाउंड |
| उत्तर प्रदेश (पूर्वी व पश्चिमी बेल्ट) | ₹5,800–₹6,400 | ₹5,800–₹6,450 | ₹5,800–₹6,500 | धीमी मजबूती, MSP के ऊपर/आसपास |
| मध्य प्रदेश | ₹5,700–₹6,200 | ₹5,700–₹6,250 | ₹5,700–₹6,300 | स्थिर से हल्का मजबूत |
📌 ट्रेडिंग एवं प्रोक्योरमेंट रणनीति सुझाव
किसान (उत्पादक) के लिए
- जहां मंडी भाव MSP (₹5,950/क्विंटल) से ऊपर चल रहे हों, वहां क्रमिक रूप से बिक्री (स्टेप्ड सेलिंग) की रणनीति अपनाना उचित हो सकता है, ताकि संभावित बाद की मजबूती का भी कुछ लाभ लिया जा सके।
- जिन क्षेत्रों में भाव MSP से नीचे हैं, वहां यदि भंडारण की सुविधा और वित्तीय क्षमता हो तो सीमित स्टॉक होल्डिंग पर विचार किया जा सकता है, लेकिन मिल खरीद में सुस्ती को देखते हुए अत्यधिक होल्डिंग से बचें।
- मौसम के तेज़ गर्म होने की स्थिति में कटाई–मड़ाई समय पर पूरी करना और नमी प्रबंधन पर ध्यान देना ज़रूरी है, ताकि गुणवत्ता पर असर न पड़े।
तेल मिलें और प्रसंस्करण इकाइयाँ
- वर्तमान नरम/रेंज-बाउंड बाज़ार में, हैंड-टू-माउथ से थोड़ा आगे बढ़कर 2–4 सप्ताह की आवश्यकताओं तक कवर बढ़ाने पर विचार किया जा सकता है, विशेषकर यदि स्थानीय मंडी भाव ₹6,000/क्विंटल के आसपास या उससे नीचे मिल रहे हों।
- उच्च गुणवत्ता वाले निर्यात-ग्रेड (येलो/माइक्रो/सॉर्टेक्स) पर FOB ऑफ़र ~₹7,500–₹9,000/क्विंटल के समकक्ष हैं; यदि अंतरराष्ट्रीय तेल/खली बाज़ार में सुधार दिखे तो निर्यात–उन्मुख क्रशिंग के अवसर तलाशे जा सकते हैं।
- फ्यूचर्स पर प्रतिबंध के कारण सट्टा हेजिंग सीमित है, इसलिए भौतिक स्टॉक और फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट के माध्यम से जोखिम प्रबंधन पर ज़ोर देना होगा।
ट्रेडर्स और स्टॉकिस्ट
- रॉ टेक्स्ट के अनुसार, बाज़ार फिलहाल साइडवेज़ से हल्का कमजोर है; ऐसे में रेंज ट्रेडिंग (निचले स्तर पर खरीद, ऊपरी स्तर पर बुकिंग) की रणनीति उपयुक्त है, लेकिन अत्यधिक लीवरेज से बचें।
- MSP के आसपास के स्तरों पर सरकार द्वारा किसी भी संभावित हस्तक्षेप या खरीद कार्यक्रम की घोषणा पर नज़र रखें, जो नीचे की ओर सपोर्ट को मजबूत कर सकता है।
- अंतरराष्ट्रीय कैनोला/रेपसीड मार्केट और वनस्पति तेल कॉम्प्लेक्स (सोयाबीन, पाम) के रुझान पर निगरानी रखें, क्योंकि इनकी मजबूती सरसों पर भी सकारात्मक प्रभाव डाल सकती है।
निष्कर्षात्मक दृष्टिकोण
- निकट अवधि (अगले 2–4 सप्ताह) के लिए बेस केस: कीमतें सीमित दायरे में, हल्का नरम से स्थिर।
- बुलिश ट्रिगर: तेल मिल खरीद में स्पष्ट बढ़ोतरी, सरसों तेल/खली की मांग में उछाल, या मौसम से जुड़ा किसी प्रमुख उत्पादक क्षेत्र में नुकसान।
- बेयरिश ट्रिगर: कटाई के चरम पर अत्यधिक आवक, मिल मार्जिन में और गिरावट, या वैश्विक तेलबीज बाज़ार में अतिरिक्त आपूर्ति का दबाव।









