इस सीज़न में कोंकण क्षेत्र में हापुस (अल्फांसो) आम की पैदावार में तेज़ गिरावट के कारण आपूर्ति बेहद सीमित है और पुणे मार्केट यार्ड में आवक सामान्य के 30–40% तक सिमट गई है। मांग पहले से मज़बूत है और 19 मार्च की गुड़ी पड़वा से पहले और बाद में खपत बढ़ने की उम्मीद है, जिससे खुदरा और थोक दोनों बाज़ारों में दाम ऊंचे बने रहने की संभावना है। मौसम की अनियमितता, नमी और थ्रिप्स व हॉपर जैसे कीटों के प्रकोप ने बाग़ों में गंभीर नुकसान किया है, जिसके चलते कई किसानों की उपज अनुमानित स्तर के केवल 30–40% पर आकर रुक गई है।
कोंकण के रत्नागिरी, रायगढ़ और सिंधुदुर्ग ज़िलों में शुरुआती बरसात से मिट्टी की नमी और फूल आने की स्थिति अनुकूल दिखी थी, लेकिन बाद में तापमान में उतार–चढ़ाव और अधिक आर्द्रता ने फूलों और फल बनने की प्रक्रिया को बुरी तरह प्रभावित किया। पुणे मार्केट यार्ड में जहां पिछले वर्ष 10–15 मार्च के बीच रोज़ाना 2,000–3,000 पेटियां हापुस की आती थीं, वहीं इस साल समान अवधि में केवल 150–200 पेटियां ही पहुंच रही हैं। मांग के मुकाबले इतनी कम आवक से बाज़ार में तीखी कमी महसूस हो रही है और व्यापारी गुड़ी पड़वा के आसपास दर्जन के भाव में तेज़ उछाल की आशंका जता रहे हैं। कच्चे माल की इस कमी का असर आगे चलकर जूस, पल्प और सूखे आम (ड्राइड मैंगो) की अंतरराष्ट्रीय क़ीमतों पर भी दिखाई दे सकता है, हालांकि अभी वियतनाम और थाईलैंड से सूखे आम की आपूर्ति और दाम अपेक्षाकृत स्थिर हैं।
Exclusive Offers on CMBroker

Mango dried
chunks: : 2 – 3 cm. Thickness: 2 mm. – 15 mm MOISTURE 13 – 19 %
FOB 5.62 €/kg
(from VN)

Mango dried
slices: 5 – 9 cm. Chunks: : 2 – 3 cm. Thickness: 2 mm. – 15 mm
FOB 5.82 €/kg
(from VN)

Mango dried
normal sugar, 8-10 mm
FCA 4.52 €/kg
(from NL)
📈 कीमतों की मौजूदा तस्वीर
रॉ टेक्स्ट के अनुसार, पुणे मार्केट यार्ड के व्यापारियों का अनुमान है कि गुड़ी पड़वा (19 मार्च) के आसपास हापुस आम की कीमतें लगभग 27–43 अमेरिकी डॉलर प्रति दर्जन तक पहुंच सकती हैं। मौजूदा विनिमय दर को लगभग 1 USD ≈ 83 INR मानें तो यह दायरा लगभग 2,240–3,570 रुपये प्रति दर्जन बैठता है। यह स्तर पिछले सामान्य वर्षों की तुलना में काफी ऊंचा है और यह बताता है कि इस बार कमी कितनी तीखी है।
फरवरी के अंत और मार्च की शुरुआत में ही सीमित आवक के बीच प्री–सीज़न हापुस के कुछ लॉट पुणे में 10,000–18,000 रुपये प्रति पेटी (4–5 दर्जन) के दाम पर बिकते दिखे हैं, जो दर्जन के हिसाब से लगभग 2,000–4,500 रुपये के बीच बैठते हैं। यह दायरा रॉ टेक्स्ट में उल्लिखित गुड़ी पड़वा वाले अनुमानित स्तर के अनुरूप ही है, यानी बाज़ार पहले से ही त्योहारी प्रीमियम की ओर बढ़ रहा है।
🪙 ताज़ा अंतरराष्ट्रीय सूखे आम (ड्राइड मैंगो) के दाम – रूपांतरण के साथ
हालांकि रॉ टेक्स्ट मुख्य रूप से ताज़े हापुस आम पर केंद्रित है, लेकिन वैश्विक वैल्यू–चेन को समझने के लिए सूखे आम के मौजूदा अंतरराष्ट्रीय दामों को भी देखना ज़रूरी है। नीचे दी गई तालिका में वियतनाम और थाईलैंड से उपलब्ध सूखे आम के ऑफ़र को यूरो से भारतीय रुपये में बदला गया है (मानक मान: 1 EUR ≈ 90 INR):
| उत्पाद | उत्पत्ति / लोकेशन | डिलीवरी शर्तें | नवीनतम यूरो कीमत (EUR/kg) | नवीनतम कीमत (लगभग INR/kg) | पिछली कीमत (EUR/kg) | साप्ताहिक परिवर्तन | बाज़ार भाव |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ड्राइड मैंगो – चंक्स 2–3 सेमी, 13–19% नमी | वियतनाम / हनोई | FOB | 5.62 | ≈ 505 INR/kg | 5.62 | 0% | स्थिर |
| ड्राइड मैंगो – स्लाइस 5–9 सेमी, चंक्स | वियतनाम / हनोई | FOB | 5.82 | ≈ 524 INR/kg | 5.82 | 0% | स्थिर |
| ड्राइड मैंगो – नॉर्मल शुगर, 8–10 मिमी | थाईलैंड / स्टॉक NL | FCA | 4.52 | ≈ 407 INR/kg | 4.52 | 0% | स्थिर |
ऊपर के सभी ऑफ़र 21 फरवरी से 13 मार्च 2026 के बीच अपरिवर्तित रहे हैं, जिससे संकेत मिलता है कि अंतरराष्ट्रीय सूखे आम के बाज़ार में अभी तक कच्चे माल की भारतीय कमी का सीधा प्रभाव नहीं दिखा है। यह अंतर सामान्य है, क्योंकि सूखे आम के लिए प्रॉसेसिंग–लैग और बहु–उत्पत्ति (वियतनाम, थाईलैंड, फ़िलिपींस आदि) के कारण भारत–केंद्रित झटके तुरंत वैश्विक कीमतों में नहीं दिखते।
🌍 आपूर्ति और मांग की स्थिति
🇮🇳 कोंकण–पुणे हापुस आपूर्ति
रॉ टेक्स्ट के अनुसार, इस सीज़न में कोंकण में केवल 30–40% सामान्य फसल बची है। किसानों ने बताया कि थ्रिप्स और हॉपर कीटों के हमले से फूलों और छोटे फलों पर भारी नुकसान हुआ, जिससे बड़े पैमाने पर फ्लॉवर–ड्रॉप और फल विकास में कमी देखी गई। कई बाग़ों में अनुमानित पैदावार का 60–70% हिस्सा व्यावसायिक तुड़ाई तक पहुंच ही नहीं पाया।
पुणे मार्केट यार्ड में 10–15 मार्च के बीच रोज़ाना 2,000–3,000 पेटियों की सामान्य आवक की तुलना में इस साल केवल 150–200 पेटियां ही आ रही हैं – यानी लगभग 90% तक की गिरावट। इतनी तेज़ कमी के बावजूद, शहरी उपभोक्ता मांग और रिटेल चैनलों (ऑनलाइन प्री–ऑर्डर, हाई–एंड स्टोर्स) की मांग मज़बूत है, जिससे कम आपूर्ति और ऊंची मांग का क्लासिक परिदृश्य बन रहा है।
🎉 त्योहारी मांग: गुड़ी पड़वा और गर्मी का सीज़न
गुड़ी पड़वा (19 मार्च) महाराष्ट्र में आम की खपत के लिए एक महत्वपूर्ण त्यौहार है, जब घरों में हापुस आम और आमरस की परंपरागत मांग अचानक बढ़ जाती है। रॉ टेक्स्ट स्पष्ट रूप से बताता है कि मांग इस तारीख के आसपास और बढ़ने की उम्मीद है, जबकि आपूर्ति पहले से ही दबाव में है। इसका सीधा अर्थ है कि गुड़ी पड़वा के पहले और तुरंत बाद के 7–10 दिनों में कीमतों पर सबसे अधिक ऊपर की ओर दबाव रहेगा।
पिछले वर्ष के अनुभवों से भी यही दिखता है कि जब आवक बढ़ती है तो मई के मध्य तक पुणे में रत्नागिरी हापुस के दाम 300–600 रुपये प्रति दर्जन तक नीचे आ सकते हैं। लेकिन इस बार शुरुआती पैदावार में ही 60–70% की कमी और कीट–प्रकोप की रिपोर्ट के कारण संभावना है कि सीज़न के बाद के हिस्से में भी दाम सामान्य से ऊपर ही टिके रहें, विशेषकर प्रीमियम ग्रेड फल के लिए।
🌐 वैश्विक मांग और वैल्यू–चेन
अल्फांसो आम की वैश्विक पहचान मुख्यतः ताज़ा उच्च–गुणवत्ता वाले GI–टैग्ड फल के रूप में है, जिनका निर्यात मिडिल ईस्ट और यूरोप के निच बाज़ारों में होता है। कोंकण में उत्पादन में आई यह गिरावट निर्यात–ग्रेड फल की उपलब्धता पर भी दबाव डालेगी, जिससे निर्यातकों को या तो कम वॉल्यूम स्वीकार करने होंगे या ऊंचे दामों पर कॉन्ट्रैक्ट री–नेगोशिएट करने होंगे। यह स्थिति घरेलू बाज़ार में भी प्रीमियम सेगमेंट के दामों को सहारा देगी।
दूसरी ओर, सूखे आम और पल्प सेगमेंट में भारत के अलावा वियतनाम, थाईलैंड और फ़िलिपींस जैसे देशों की मज़बूत सप्लाई–बेस के कारण वैश्विक ग्राहकों के पास विकल्प मौजूद हैं। मौजूदा यूरो–आधारित ऑफ़रों में स्थिरता दिखाती है कि अभी तक भारतीय कच्चे माल की कमी ने इन बाज़ारों में तत्काल उछाल नहीं पैदा किया है, हालांकि यदि भारतीय प्रोसेसर कम मात्रा में फल खरीदते हैं तो अगले 6–9 महीनों में नए ऑफ़र थोड़े ऊंचे स्तर पर री–प्राइस हो सकते हैं।
📊 बुनियादी कारक (फंडामेंटल्स)
🌦️ मौसम, नमी और तापमान
रॉ टेक्स्ट के अनुसार, सीज़न की शुरुआत में कोंकण क्षेत्र में हुई वर्षा ने मिट्टी में पर्याप्त नमी बनाए रखी, जिससे रत्नागिरी, रायगढ़ और सिंधुदुर्ग के बाग़ों में फूल आने की प्रक्रिया को शुरुआती सहारा मिला। लेकिन बाद में तापमान में तेज़ उतार–चढ़ाव और लगातार अधिक आर्द्रता ने फूलों और छोटे फलों पर नकारात्मक प्रभाव डाला, जिसका परिणाम कम फल–सेट और उच्च फ्लॉवर–ड्रॉप के रूप में सामने आया।
फरवरी और मार्च में हल्की बारिश व नमी से कई इलाकों में फलों की त्वचा पर धब्बे और सड़न जैसी समस्याएं बढ़ीं, जबकि कुछ दिनों की तेज़ गर्मी–लहर (हीटवेव) ने पेड़ों पर लगे छोटे फलों में अतिरिक्त गिरावट पैदा की। भारतीय कृषि मौसम बुलेटिनों में भी कोंकण–मध्य महाराष्ट्र क्षेत्र के लिए फरवरी के दूसरे पखवाड़े में वर्षा की कमी और तापमान में बढ़ोतरी की चेतावनी दी गई थी, साथ ही फूल–झड़ाव से बचाव के लिए सिंचाई प्रबंधन पर ज़ोर दिया गया था।
🦟 कीट प्रकोप: थ्रिप्स और हॉपर
किसानों ने विशेष रूप से थ्रिप्स और हॉपर कीटों के हमले की शिकायत की है, जो आम के फूलों और कोमल फलों को चूसकर नुकसान पहुंचाते हैं और बड़े पैमाने पर फूल–झड़ाव का कारण बनते हैं। वैज्ञानिक साहित्य भी बताता है कि आम पर 400 से अधिक कीट प्रजातियां हमला करती हैं, जिनमें हॉपर और थ्रिप्स पूरे देश में सबसे गंभीर कीटों में गिने जाते हैं।
हाल के वर्षों में आंध्र प्रदेश और अन्य राज्यों में ब्लैक थ्रिप्स जैसे कीटों के कारण आम की पैदावार पर गंभीर असर देखने को मिला है, और कोंकण में इस सीज़न की रिपोर्ट उसी व्यापक प्रवृत्ति से मेल खाती दिखती है। रॉ टेक्स्ट के अनुसार, इस प्रकोप ने कई बाग़ों को केवल 30–40% अनुमानित फसल तक सीमित कर दिया, जो कि सामान्य उतार–चढ़ाव से कहीं अधिक गंभीर गिरावट है।
💸 लागत में बढ़ोतरी और किसानों पर दबाव
कम पैदावार के साथ–साथ बाग़ प्रबंधन की लागत भी इस सीज़न में बढ़ी है। किसानों को कीटनाशकों के अधिक छिड़काव, अतिरिक्त श्रमिकों की मज़दूरी और बाग़ों की देखभाल पर ज़्यादा खर्च करना पड़ा, जबकि प्रति पेड़ फल की संख्या घट गई। रॉ टेक्स्ट यह भी बताता है कि कुछ किसानों ने छोटी फसल के कारण पारंपरिक बाग़–रक्षकों (चौकीदारों) की नियुक्ति में कटौती की है, जिससे फसल–सुरक्षा पर भी जोखिम बढ़ा है।
ऐसी स्थिति में, जो किसान प्रीमियम ग्रेड हापुस को बाज़ार तक पहुंचा पा रहे हैं, वे ऊंचे दामों से कुछ हद तक नुकसान की भरपाई कर सकते हैं, लेकिन जिनके बाग़ों को कीट और मौसम ने ज़्यादा प्रभावित किया है, उनके लिए ऊंची कीमतें भी कुल आय में आई गिरावट की भरपाई नहीं कर पा रहीं। यह असंतुलन आगे चलकर बाग़ों में निवेश और रख–रखाव के निर्णयों को प्रभावित कर सकता है।
🌦️ मौसम परिदृश्य – प्रमुख उत्पादक क्षेत्र (IN)
मार्च के दूसरे पखवाड़े में कोंकण (रत्नागिरी, रायगढ़, सिंधुदुर्ग) और पश्चिमी महाराष्ट्र के अधिकांश हिस्सों में मौसम विभाग सामान्य से अधिक तापमान और अपेक्षाकृत शुष्क परिस्थितियों का पूर्वानुमान दे रहा है, केवल स्थानीय स्तर पर हल्की–फुल्की वर्षा की संभावना है। यह स्थिति अब फूल–सेट के बजाय फल–विकास के चरण के लिए अधिक प्रासंगिक है, जहां अत्यधिक गर्मी छोटे फलों में सनबर्न और अतिरिक्त गिरावट का जोखिम बढ़ा सकती है।
रॉ टेक्स्ट के अनुसार, फरवरी–मार्च में पहले ही हल्की बारिश और नमी ने फलों को नुकसान पहुंचाया है, इसलिए आगे के हफ्तों में यदि मौसम शुष्क और बहुत गर्म रहता है तो किसानों को सिंचाई और छायांकन (शेड नेट, काग़ज़ की थैलियां आदि) के माध्यम से फलों की सुरक्षा पर ज़्यादा ध्यान देना होगा। यदि आगामी तीन–चार सप्ताह में कोई बड़ा असामान्य मौसम–घटना (अचानक ओलावृष्टि या भारी बारिश) नहीं होती, तो जो फल अभी पेड़ों पर हैं वे अपेक्षाकृत सुरक्षित रह सकते हैं, लेकिन कुल उत्पादन पहले ही काफी हद तक तय हो चुका है।
🌍 वैश्विक उत्पादन और स्टॉक तुलना (संक्षिप्त परिप्रेक्ष्य)
रॉ टेक्स्ट में वैश्विक उत्पादन के विस्तृत आंकड़े नहीं दिए गए, इसलिए यहां केवल संदर्भ के रूप में संक्षिप्त परिप्रेक्ष्य प्रस्तुत है। भारत, चीन, थाईलैंड, इंडोनेशिया, मैक्सिको और पाकिस्तान दुनिया के बड़े आम उत्पादक हैं, जिनमें भारत का हिस्सा सबसे बड़ा है। अल्फांसो जैसे प्रीमियम डेज़र्ट–टाइप आम मुख्यतः भारत और कुछ हद तक पाकिस्तान के कुछ क्षेत्रों तक सीमित हैं, इसलिए कोंकण में गिरावट का सीधा विकल्प वैश्विक स्तर पर सीमित है।
सूखे आम और पल्प बाज़ार में हालांकि दक्षिण–पूर्व एशिया की मज़बूत सप्लाई–बेस के कारण स्टॉक अपेक्षाकृत आरामदेह दिखते हैं। वियतनाम और थाईलैंड से स्थिर यूरो–कीमतें और पर्याप्त ऑफ़र यह संकेत देते हैं कि फिलहाल अंतरराष्ट्रीय प्रोसेसर और ट्रेडर स्टॉक–कम्पोर्टेबल हैं और उन्हें तुरंत भारतीय हापुस की कमी के कारण दाम बढ़ाने की ज़रूरत महसूस नहीं हो रही। लेकिन यदि अगले एक–दो सीज़न तक भारत में उत्पादन दबाव में रहता है, तो प्रीमियम आम–आधारित उत्पादों में धीरे–धीरे प्राइस–रीसेट हो सकता है।
📉 भाव–संकलन: ताज़ा हापुस बनाम सूखे आम
| उत्पाद | बाज़ार / लोकेशन | इकाई | अनुमानित मौजूदा दाम (INR) | पिछला सामान्य दायरा (INR) | टिप्पणी |
|---|---|---|---|---|---|
| ताज़ा हापुस (प्रीमियम, गुड़ी पड़वा) | पुणे मार्केट यार्ड | प्रति दर्जन | ≈ 2,240–3,570 | ≈ 500–1,500 | रॉ टेक्स्ट के USD 27–43/दर्जन अनुमान से रूपांतरण; सामान्य वर्षों से काफी ऊपर |
| ताज़ा रत्नागिरी हापुस (पीक सीज़न) | पुणे मार्केट यार्ड (ऐतिहासिक) | प्रति दर्जन | ≈ 300–600 (मई 2025) | ≈ 300–700 | पीक आवक पर दाम गिरते हैं; इस वर्ष इतनी गिरावट सीमित रह सकती है। |
| ड्राइड मैंगो – वियतनाम | FOB हनोई | प्रति किग्रा | ≈ 505–524 | ≈ 500–530 | पिछले 3–4 हफ्तों से स्थिर, कोई उल्लेखनीय बदलाव नहीं |
| ड्राइड मैंगो – थाईलैंड | FCA नीदरलैंड्स | प्रति किग्रा | ≈ 407 | ≈ 400–420 | यूरो–कीमत स्थिर; वैश्विक स्टॉक आरामदेह |
📆 अल्पकालिक पूर्वानुमान और ट्रेडिंग आउटलुक
🔮 3–4 सप्ताह का परिदृश्य (मार्च अंत तक)
- कोंकण में पहले ही 60–70% पैदावार का नुकसान हो चुका है, इसलिए अब मौसम में मामूली सुधार से भी कुल उत्पादन में बड़ा बदलाव संभव नहीं है।
- गुड़ी पड़वा के आसपास और उसके तुरंत बाद 7–10 दिनों तक पुणे और अन्य शहरी बाज़ारों में हापुस की मांग चरम पर रहेगी, जबकि आवक रॉ टेक्स्ट के अनुसार सामान्य से बहुत कम है।
- इस अवधि में प्रीमियम दर्जन के दाम 2,200–3,500 रुपये के ऊंचे दायरे में बने रहने या उससे भी ऊपर जाने का जोखिम है, विशेषकर अच्छी ग्रेडिंग और बड़े आकार के फलों के लिए।
- सीज़न के आगे बढ़ने पर (अप्रैल–मई) कुछ हद तक आवक बढ़ सकती है, लेकिन कुल फसल कम होने से दाम सामान्य वर्षों की तुलना में ऊंचे रहने की संभावना है।
📌 ट्रेडिंग और ख़रीद–फरोख़्त के लिए सुझाव
- थोक व्यापारी (पुणे/महाराष्ट्र): सीमित आपूर्ति और ऊंची मांग को देखते हुए भारी शॉर्ट–सेलिंग से बचें; जो भी कॉन्ट्रैक्ट करें, उसके लिए बाग़–स्तर पर फसल की वास्तविक स्थिति की पुष्टि कर लें। प्रीमियम ग्रेड के लिए अग्रिम बुकिंग और गुणवत्ता–आधारित प्राइसिंग मॉडल अपनाना लाभकारी रहेगा।
- प्रोसेसर (पल्प/जूस/ड्राइड मैंगो): यदि उत्पाद पोर्टफोलियो केवल हापुस पर निर्भर है तो कच्चे माल की लागत बढ़ने के लिए तैयार रहें और वैकल्पिक वैरायटी (केसर, टोटापुरी आदि) या वैकल्पिक मूल (वियतनाम, थाईलैंड) से आंशिक सोर्सिंग पर विचार करें।
- एक्सपोर्टर: GI–टैग्ड रत्नागिरी/देवगढ़ हापुस के लिए निर्यात–कॉन्ट्रैक्ट में वॉल्यूम और कीमत, दोनों में लचीलापन रखें। सीमित फसल के कारण समय पर शिपमेंट और क्वालिटी–कन्सिस्टेंसी सबसे बड़ी चुनौती रहेगी।
- किसान (कोंकण क्षेत्र): अल्पकाल में, उपलब्ध फसल पर ध्यान केंद्रित करते हुए कीट–प्रबंधन (इंटीग्रेटेड पेस्ट मैनेजमेंट) और सनबर्न–सुरक्षा पर ज़ोर दें। मध्यम अवधि में, जल–प्रबंधन, छत्र–प्रबंधन और कीट–नियंत्रण पर वैज्ञानिक सलाह लेकर बाग़ों की रेज़िलिएंस बढ़ाना ज़रूरी होगा।
- रिटेल चेन और ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म: प्रीमियम हापुस के लिए डायनेमिक प्राइसिंग और सीमित–समय ऑफ़र (जैसे छोटे पैक, मिश्रित वैरायटी बॉक्स) के ज़रिए मार्जिन और वॉल्यूम दोनों को संतुलित किया जा सकता है।
📆 3-दिवसीय क्षेत्रीय मूल्य पूर्वानुमान (पुणे – ताज़ा हापुस, प्रति दर्जन, INR)
नीचे दिया गया पूर्वानुमान रॉ टेक्स्ट में वर्णित सीमित आवक (150–200 पेटियां/दिन), त्योहारी मांग और हालिया मंडी–रुझानों के संयोजन पर आधारित है। यह केवल प्रीमियम ग्रेड (अच्छे आकार और रंग) के लिए अनुमानित दायरा है:
| तारीख | अपेक्षित थोक दाम (INR/दर्जन) | बाज़ार भावना | टिप्पणी |
|---|---|---|---|
| 17 मार्च 2026 | ≈ 2,000–3,000 | तेज़ी | सीमित आवक, गुड़ी पड़वा से ठीक पहले प्री–फेस्टिवल स्टॉकिंग |
| 18 मार्च 2026 | ≈ 2,200–3,200 | मज़बूत तेज़ी | त्योहारी मांग बढ़ती; नए खरीदारों की एंट्री से बोली ऊंची |
| 19 मार्च 2026 (गुड़ी पड़वा) | ≈ 2,400–3,500 | चरम तेज़ी | रॉ टेक्स्ट के USD 27–43/दर्जन अनुमान के अनुरूप, उच्चतम त्योहारी प्रीमियम |
इन अनुमानों में यह मानकर चला गया है कि अगले तीन दिनों में कोंकण से पुणे की आवक 150–200 पेटियां/दिन के आसपास ही रहती है और मौसम में कोई बड़ा व्यवधान (अचानक भारी बारिश या परिवहन–बाधा) नहीं आता। यदि किसी कारण से आवक थोड़ी बढ़ती है, तो ऊपरी दायरा कुछ हद तक नरम हो सकता है, लेकिन समग्र रूप से बाज़ार की दिशा निकट भविष्य में स्पष्ट रूप से तेज़ी की ही दिखती है।








